Special: सीहोर के 2000 साल पुराने चिंतामन गणेश की अनोखी परंपरा, उल्टा स्वास्तिक बनाने से पूरी होती है मन्नत!

Chintaman Ganesh Swastik Tradition : सीहोर के करीब 2000 साल पुराने चिंतामन गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर 12 दिवसीय मेला शुरू हुआ। यहां उल्टा स्वास्तिक बनाने की अनोखी परंपरा है।
Chintaman Ganesh Temple
चिंतामण गणेशफोटो सोर्स- नवभारत
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Sehore Chintaman Ganesh Temple : मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के साथ 12 दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई है। गणेश उत्सव के दौरान देशभर से श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन और अपनी मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं। मंदिर अपनी प्राचीनता के साथ यहां निभाई जाने वाली अनोखी परंपरा के लिए भी श्रद्धालुओं के बीच खास आस्था का केंद्र है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश में भगवान गणेश की चार प्रमुख स्वयंभू प्रतिमाओं में सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर की प्रतिमा भी शामिल है। अन्य तीन प्रतिमाएं राजस्थान के रणथंभौर, उज्जैन और गुजरात के सिद्धपुर में बताई जाती हैं। यही वजह है कि गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचती है।

उल्टा स्वास्तिक बनाने की अनोखी मान्यता

चिंतामन गणेश मंदिर में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए मंदिर की दीवार पर गोबर या सिंदूर से उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान गणेश उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं और भगवान के प्रति आभार जताते हैं।

सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ी है मंदिर की कहानी

इतिहास और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर का इतिहास करीब 2 हजार वर्ष पुराना माना जाता है। किंवदंती है कि सम्राट विक्रमादित्य को पार्वती नदी में कमल के पुष्प के रूप में भगवान गणेश मिले थे। वे उन्हें अपने रथ में लेकर जा रहे थे, लेकिन भोर होने पर रथ रुक गया। इसी दौरान कमल पुष्प गणेश प्रतिमा में बदल गया और प्रतिमा का एक हिस्सा जमीन में धंस गया। मंदिर में आज भी भगवान गणेश की आधी प्रतिमा जमीन में धंसी हुई दिखाई देती है।

बाजीराव पेशवा ने कराया था सभा मंडप का निर्माण

मंदिर के संरक्षण और विकास में अलग-अलग दौर के राजाओं का योगदान बताया जाता है। मंदिर के जीर्णोद्धार और विशाल सभा मंडप के निर्माण का श्रेय बाजीराव पेशवा प्रथम को दिया जाता है। इसके अलावा राजा भोज, शालीवाहन शक, कृष्ण राय, गोंड राजा नवल शाह और नानाजी पेशवा का नाम भी मंदिर की व्यवस्था और विकास से जोड़ा जाता है।

Chintaman Ganesh Temple
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12 दिन चलेगा गणेश उत्सव

गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ मेला 12 दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सुरक्षा और सुविधाओं के इंतजाम किए गए हैं। मंदिर में पहुंच रहे भक्तों के लिए यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ चिंतामन गणेश की प्राचीन परंपराओं को करीब से देखने का अवसर भी है।

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