Ujjain Viral Video : उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से सामने आए एक वायरल वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में किन्नर अखाड़े से जुड़ी काली उर्फ नंद गिरि जलती चिता के पास तलवार लेकर पहुंचती दिखाई दे रही हैं। इसके बाद वह कथित रूप से चिता से कोई सामग्री निकालकर खाते हुए नजर आती हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद संत समाज और आम लोगों की ओर से आपत्ति जताई जा रही है। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही सामग्री वास्तव में क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वायरल वीडियो में काली उर्फ नंद गिरि हाथ में तलवार लिए चक्रतीर्थ श्मशान घाट में जलती चिता के पास पहुंचती दिखाई देती हैं। वीडियो में वह कुछ मंत्र बोलने के बाद तलवार को चिता के अंदर डालती नजर आती हैं। इसके बाद वह कथित रूप से चिता से कोई टुकड़ा निकालती हैं और उसे खाते हुए दिखाई देती हैं।
वायरल वीडियो में काली उर्फ नंद गिरि कथित रूप से निकाली गई सामग्री को गर्म और स्वादिष्ट बताती हुई दिखाई देती हैं। साथ ही वह लोगों को उनसे बचकर रहने की बात भी कहती नजर आती हैं। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही सामग्री क्या थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में पुलिस जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
मामले को लेकर अघोरी अखाड़े के पीठाधीश्वर एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ ने पुलिस से शिकायत की है। शिकायत में सनातन और अघोर परंपरा के नाम पर कथित तौर पर पाखंड फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने वायरल वीडियो की जांच कर वास्तविक तथ्यों का पता लगाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, यदि जांच में यह सामने आता है कि वीडियो में दिखाई गई सामग्री वास्तव में मानव अवशेष थी और उसके साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई, तो मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 के तहत जांच के दायरे में आ सकता है। हालांकि इस धारा का लागू होना और किसी अपराध का बनना जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा।
वीडियो को लेकर संत समाज की ओर से भी आपत्ति जताई गई है। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि ने कहा कि अघोर साधना की अपनी मर्यादा और परंपराएं हैं। उनके मुताबिक तांत्रिक या गुप्त साधनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन उचित नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं के नाम पर सोशल मीडिया पर इस तरह की गतिविधियों का प्रदर्शन समाज में गलत संदेश दे सकता है।
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रही सामग्री की वास्तविकता और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि उज्जैन पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। शिकायत के बाद अब पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना के संदर्भ और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर सकती है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।