वन विभाग के कर्मचारियों की दावत (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उज्जैन

MP News: ड्यूटी ऑफ डाल-बाटी पार्टी ऑन, उज्जैन में काम के वक्त वन कर्मियों की दावत; मनाया जा रहा था बर्थडे

Ujjain Forest Department Party Video: उज्जैन के वन भवन कार्यालय में काम छोड़ दाल-बाटी बनाते दिखे वन विभाग के कर्मचारी, अरुण वाडिया के जन्मदिन पर दावत।

सजल रघुवंशी

Forest Department Officials Dal Bati Party Ujjain: उज्जैन के वन भवन स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में वन विभाग के कुछ कर्मचारी कार्यालय परिसर में दाल-बाटी बनाते नजर आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह तैयारी विभाग के कर्मचारी अरुण वाडिया के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के लिए की जा रही थी। मामला सामने आने के बाद सरकारी समय और संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

कार्यालय परिसर में जन्मदिन की तैयारियां

जानकारी के अनुसार वन विभाग के कर्मचारी कार्यालय परिसर में ही भोजन बनाने की व्यवस्था में जुटे हुए थे। वीडियो में कुछ कर्मचारी दाल-बाटी तैयार करते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह आयोजन कर्मचारी अरुण वाडिया के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किया जा रहा था। हालांकि, इस दौरान नियमित कार्यालयीन कार्यों पर कितना प्रभाव पड़ा, इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सरकारी समय में निजी आयोजन पर सवाल

सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित समय में विभागीय और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें। ऐसे में कार्यालयीन समय के दौरान कर्मचारियों का निजी आयोजन की तैयारियों में व्यस्त नजर आना कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि कर्मचारी सरकारी कामकाज छोड़कर अन्य गतिविधियों में समय बिताएंगे तो इसका असर आम नागरिकों से जुड़े कार्यों और विभागीय कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।

सरकारी संसाधनों के उपयोग पर भी उठे प्रश्न

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि गतिविधियां किसी निजी स्थान पर नहीं बल्कि सरकारी कार्यालय परिसर में होती दिखाई दीं। ऐसे में कार्यालयीन संसाधनों और सरकारी परिसर के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन और कार्य संस्कृति को लेकर इस घटना ने नई चर्चा को जन्म दिया है।

विभाग के जवाब का इंतजार

फिलहाल मामले को लेकर वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर है कि वे इस मामले को किस तरह देखते हैं और क्या कोई जांच या जवाबदेही तय की जाती है। विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश के इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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