Highlights:
महाकाल मंदिर में रूप चौदस पर दीपावली उत्सव का आगाज।
बाबा महाकाल को केसर-चंदन का उबटन लगाकर कराया अभ्यंग स्नान।
साल में एक बार होने वाली विशेष कपूर आरती संपन्न।
नए अन्न और सब्जियों से तैयार अन्नकूट का महाभोग अर्पित।
Mahakal Temple Diwali Celebration : देशभर में दीपावली की खुशियां मनाए जाने से पहले उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीप पर्व का आगाज हुआ। मृत्युलोक के राजा बाबा महाकाल के दरबार में रूप चौदस पर विशेष पूजन-अर्चन किया गया।
भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को केसर-चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से अभ्यंग स्नान कराया गया। इसके बाद बाबा को नए अन्न और सब्जियों से तैयार अन्नकूट का महाभोग अर्पित किया गया। मंदिर में फूलझड़ी जलाकर दीपावली उत्सव की शुरुआत भी की गई।
महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार रूप चौदस पर पुजारी परिवार की महिलाओं और बच्चों ने भगवान महाकाल को केसर-चंदन का उबटन लगाया। इसके बाद पुजारियों ने गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से बाबा का अभ्यंग स्नान कराया। इस विशेष पूजन के दौरान मंदिर में भक्तिमय माहौल रहा।
अभ्यंग स्नान के बाद भगवान महाकाल की विशेष कपूर आरती की गई। यह आरती साल में केवल एक बार दीपावली के अवसर पर आयोजित होती है। मंदिर की परंपरा के अनुसार इस दिन बाबा का विशेष श्रृंगार और पूजन किया जाता है। रूप चौदस पर होने वाला यह अनुष्ठान महाकाल मंदिर के प्रमुख वार्षिक धार्मिक आयोजनों में शामिल है।
दीपावली के अवसर पर महाकाल मंदिर में अन्नकूट महोत्सव भी मनाया गया। नए अन्न, धान और विभिन्न सब्जियों से तैयार पकवानों का महाभोग भगवान महाकाल को अर्पित किया गया। मान्यता के अनुसार अन्नकूट के जरिए नई फसल और अन्न के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। महाकाल मंदिर में इस आयोजन के बाद अब उज्जैन के दूसरे मंदिरों में भी अन्नकूट महोत्सव की धूम रहेगी।
महाकाल मंदिर में दीपावली की शुरुआत के प्रतीक स्वरूप भस्म आरती के दौरान फूलझड़ी जलाई गई। मंदिर की परंपरा के अनुसार दिन में होने वाली चारों आरतियों- भस्म आरती, अभ्यंग स्नान आरती, संध्या आरती और शयन आरती में एक-एक फूलझड़ी जलाकर दीप पर्व का शुभारंभ किया गया। इस तरह बाबा महाकाल के दरबार में सबसे पहले दीपावली मनाने की सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर निभाई गई।