ED Action Fails In Sehore Paneer Factory: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के पिपलियामीरा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई के बाद जिस मिलावटी और अवैध पनीर फैक्ट्री को पूरी तरह बंद कर सील कर दिया गया था, वह आज भी धड़ल्ले से संचालित हो रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी हेराफेरी से बेखबर प्रशासन और खाद्य विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है, जिससे अब अधिकारियों की मिलीभगत और साठगांठ की बू आने लगी है।
विगत दिनों ईडी की टीम ने सीहोर जिले में पिपलियामीरा स्थित इस फैक्ट्री पर छापा मारकर इसे सील किया था। फैक्ट्री का मुख्य संचालक किशन मोदी वर्तमान में संगीन आरोपों के तहत जेल की सलाखों के पीछे बंद है। कानूनन इस परिसर में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए थी। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर पर्दे के पीछे से खेल रचा जा रहा है।
ठप पड़ी इस विवादित फैक्ट्री को दोबारा चालू करने के लिए एक नया पैंतरा आजमाया गया है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार, अब इस फैक्ट्री का संचालन 'हेल्थ ब्रिज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड' के नए नाम से किया जा रहा है। नाम का बोर्ड जरूर बदल गया है लेकिन इसके भीतर का ढर्रा और अवैध नेटवर्क वही पुराना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे और सुबह के वक्त यहां से गाड़ियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा बंद कराई गई फैक्ट्री दोबारा शुरू हो जाती है और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती? इस मामले ने खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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क्या वाकई अधिकारी इस पूरे खेल से अनजान हैं, या फिर रसूखदारों के दबाव और 'ले-देकर' मामले को दबाने की मिलीभगत चल रही है? जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली इस फैक्ट्री का दोबारा खुलना सीधे तौर पर कानून को चुनौती देना है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या जांच के नाम पर फिर लीपापोती की जाती है।
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