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सीहोर में दो बच्चों की मां के नाम स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर पांच मामले दर्ज।
रिकॉर्ड में दो डिलीवरी, दो अतिरिक्त डिलीवरी और एक गर्भपात दर्ज।
कविता यादव पिछले दो साल से जननी सुरक्षा योजना की सहायता राशि के लिए परेशान।
जानकारी के मुताबिक कविता यादव की पहली डिलीवरी वर्ष 2021 में और दूसरी डिलीवरी वर्ष 2024 में इटारसी में हुई थी। दोनों प्रसव के बाद उन्हें जननी सुरक्षा योजना के तहत आर्थिक सहायता मिलनी थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर उनके नाम पांच अलग अलग मामले दर्ज दिखाई दिए। महिला को जब लंबे समय तक योजना की राशि नहीं मिली तो उन्होंने इसकी जानकारी जुटाई। जांच के दौरान पोर्टल पर दर्ज अतिरिक्त डिलीवरी और गर्भपात के रिकॉर्ड सामने आए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की डेटा एंट्री और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे।
योजना के निर्धारित प्रावधानों के मुताबिक पात्र प्रसूता को प्रसव के 15 से 45 दिनों के भीतर सहायता राशि बैंक खाते में मिलनी चाहिए। लेकिन कविता यादव को दो साल बीत जाने के बाद भी राशि नहीं मिली। पोर्टल पर दर्ज गलत रिकॉर्ड के कारण भुगतान अटकने की बात सामने आई है।
मामले की शिकायत लेकर कविता जब इटारसी अस्पताल पहुंचीं तो वहां के कर्मचारियों ने बताया कि संबंधित डेटा सीहोर जिला चिकित्सा विभाग की ओर से पोर्टल पर दर्ज किया गया है। इसलिए रिकॉर्ड में सुधार भी सीहोर से ही होगा। सीहोर में हुई जांच के दौरान डेटा फीडिंग की गलती स्थानीय एएनएम ज्योति सोलंकी द्वारा किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, एएनएम का कहना था कि उन्हें खुद जानकारी नहीं है कि महिला के खाते में योजना की राशि क्यों नहीं पहुंची। उन्होंने केवल दस्तावेज लिए थे।
मामले को लेकर सीहोर के सीएमएचओ सुधीर कुमार डेहरिया से बात की गई। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर अपडेट होने के कारण कुछ तकनीकी त्रुटियां सामने आ रही हैं। इन्हें सुधारने का काम किया जा रहा है।
इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब महिला के केवल दो बच्चे हैं, तो पोर्टल पर पांच मामलों का रिकॉर्ड कैसे दर्ज हो गया? डेटा फीडिंग के बाद उसका सत्यापन क्यों नहीं किया गया? सबसे अहम सवाल ये है कि तकनीकी या विभागीय गलती का खामियाजा एक पात्र महिला को दो साल तक क्यों भुगतना पड़ा?