निर्मला सप्रे केस (सोर्स- सोशल मीडिया) 
सागर

MP News: बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई; 90 दिन की समय-सीमा पर उठे सवाल

MP High Court On Nirmala Sapre Case: बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल केस में एमपी हाईकोर्ट में आज महा-सुनवाई, 720 दिन की देरी पर कोर्ट नाराज, उमंग सिंघार से मांगे भाजपा सदस्यता के सबूत।

सजल रघुवंशी

Nirmala Sapre Defection Case: मध्य प्रदेश की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के कथित दलबदल का मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर की गई याचिका पर आज गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक बार फिर महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है।

इस याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) का हवाला देते हुए निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को तुरंत समाप्त करने की मांग की गई है।

720 दिन से अधिक का समय बीतने पर कोर्ट नाराज

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दलबदल से जुड़े मामलों में निर्णय लेने के लिए तय की गई 90 दिनों की समय-सीमा का विशेष रूप से उल्लेख किया था। अदालत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई थी कि इस मामले में निर्धारित समय से कहीं ज्यादा यानी 720 दिन से अधिक का समय बीत चुका है। इस पर राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को आश्वस्त किया था कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) इस मामले की विधिवत सुनवाई कर रहे हैं। याचिकाकर्ता द्वारा जो भी साक्ष्य (सपूत) सौंपे गए हैं, उनकी जांच प्रक्रिया फिलहाल जारी है।

मैं कांग्रेस में ही हूँ- विधायक का दावा

इस पूरे कानूनी विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पिछली सुनवाई के दौरान खुद विधायक निर्मला सप्रे ने हाईकोर्ट के सामने यह बयान दिया कि उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है और वह अब भी कांग्रेस की ही प्राथमिक सदस्य हैं। कोर्ट ने उनके इस बयान को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर ले लिया है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को यह साबित करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि निर्मला सप्रे ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की है। कोर्ट ने इसके लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

निर्मला सप्रे ने साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 5 मई को वह अचानक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा के एक मंच पर नजर आईं, जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की खबरें और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।

सदस्यता रद्द करने की याचिका

इसके बाद 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने सप्रे की सदस्यता रद्द करने की याचिका लगाई थी। जब स्पीकर स्तर पर इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका, तो सिंघार ने नवंबर 2024 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आज होने वाली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि याचिकाकर्ता कोर्ट के सामने क्या नए सबूत पेश करते हैं।

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