पन्ना में छात्रा ने यूनिवर्सिटी पर लगाए गंभीर आरोप (सोर्स- सोशल मीडिया)
पन्ना

पन्ना: डिग्री के बदले मांगी ₹36 हजार की फीस, M.Tech छात्रा ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

Degree Fee Dispute Panna: पन्ना में निजी यूनिवर्सिटी की मनमानी, एम.टेक छात्रा ने लगाया आरोप— पूरी फीस जमा करने के बाद भी रोकी मार्कशीट और डिग्री, मांगे जा रहे 36 हजार रुपये और ब्याज

सरजू पटेल, सजल रघुवंशी

MTech Student Student Allegations On University: मध्य प्रदेश के सागर संभाग के पन्ना जिले से निजी यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक एम.टेक छात्रा ने आरोप लगाया है कि पूरी फीस जमा करने के बावजूद उसे अंतिम वर्ष की मार्कशीट और डिग्री नहीं दी जा रही है। छात्रा का दावा है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन अब उससे 36 हजार रुपए और ब्याज समेत अतिरिक्त राशि जमा करने की मांग कर रहा है। परेशान छात्रा ने अब कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है।

मामला पन्ना जिले के बृजपुर गांव की रहने वाली रेशमा अहिरवार से जुड़ा है। रेशमा के मुताबिक उसने एकेएस यूनिवर्सिटी से एम.टेक की पढ़ाई पूरी की है। प्रवेश के समय दो वर्षीय पाठ्यक्रम की कुल फीस 55 हजार 500 रुपए बताई गई थी। छात्रा का कहना है कि उसने निर्धारित फीस किश्तों में पूरी तरह जमा कर दी थी।

यूनिवर्सिटी ने मांगे 36 हजार रुपए, नहीं दे रहे डिग्री

पढ़ाई पूरी होने के बाद कथित तौर पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उससे 36 हजार रुपए अतिरिक्त और ब्याज की मांग कर दी। छात्रा के अनुसार यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि उसे शासन की ओर से अधिक स्कॉलरशिप प्राप्त हुई है, इसलिए अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी। छात्रा का आरोप है कि जब तक यह रकम जमा नहीं की जाएगी, तब तक उसकी अंतिम वर्ष की मार्कशीट और डिग्री नहीं दी जाएगी।

छात्रा ने लगाए यह गंभीर आरोप

मामले में छात्रा ने एक और गंभीर सवाल उठाया है। उसका कहना है कि उसके साथ पढ़ने वाली छात्रा लक्ष्मी कुशवाहा से निर्धारित 55 हजार 500 रुपए ही लिए गए और उसे डिग्री व मार्कशीट भी दे दी गई। ऐसे में एक ही पाठ्यक्रम के छात्रों से अलग-अलग राशि की मांग क्यों की जा रही है, यह सवाल खड़ा हो गया है।

जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत कर चुकी है रेशमा

रेशमा पहले जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत कर चुकी है। संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर उसने कलेक्टर उषा परमार को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। छात्रा का कहना है कि वह गरीब परिवार से है और अतिरिक्त रकम देने में असमर्थ है। डिग्री और मार्कशीट नहीं मिलने से उसका करियर और भविष्य प्रभावित हो रहा है। अब सवाल यह है कि छात्रा के आरोपों में कितनी सच्चाई है और यूनिवर्सिटी की ओर से अतिरिक्त राशि मांगने का आधार क्या है? प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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