प्रसूता को खटिया पर ले जाते ग्रामीण फोटो सोर्स- सोशल मीडिया
मुरैना

मुरैना में गर्भवती महिला को खटिया पर लिटाकर उफनता रपटा कराया पार, देवगढ़ में 40 लोगों को किया रेस्क्यू

Morena Heavy Rain : मुरैना में बाढ़ के बीच ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को खटिया पर लिटाकर उफनता रपटा पार कराया। देवगढ़ में SDERF ने बाढ़ में फंसे 40 लोगों का रेस्क्यू किया।

योगेश पाराशर, प्रीतेश जैन

Morena Flood News : मुरैना जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर हैं और कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी जान जोखिम में डालकर पानी पार करना पड़ रहा है। सबलगढ़ के रामपुर क्षेत्र के जोसिंल का पुरा गांव में एक गर्भवती महिला को बाढ़ के पानी से निकालने के लिए ग्रामीणों ने खटिया का सहारा लिया।

बाढ़ के पानी में डूबे रपटे को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को खटिया पर लिटाया और उसे कंधों पर उठाकर पानी के बीच से सुरक्षित निकालने की कोशिश की। रपटे पर पानी तेज रफ्तार से बह रहा था। ऐसे में प्रसूता को इस तरह निकालना ग्रामीणों के लिए भी बेहद जोखिम भरा था। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह किए बिना महिला को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

देवगढ़ में 40 लोग बाढ़ में फंसे

इधर, देवगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम काबिल में भी बाढ़ का पानी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया। यहां बाढ़ के पानी में करीब 40 लोग फंस गए थे। सूचना मिलने के बाद SDERF की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें बाढ़ राहत कैंप में पहुंचाया गया, जहां उनके ठहरने और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

कलेक्टर ने बाढ़ प्रभावित गांवों का किया दौरा

बाढ़ के हालात को देखते हुए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने रविवार को पहाड़गढ़ और कैलारस विकासखंड के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने लीलहर का पुरा, रीझोनी, बिशनोरी और निमांस-जोनारा समेत कई गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से हालात की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को रेस्क्यू कार्य में पूरी तत्परता बरतने और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

जलस्तर कम होते ही सर्वे के निर्देश

कलेक्टर जांगिड़ ने बताया कि सोन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण इन गांवों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी का स्तर कम होते ही प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे का काम शुरू किया जाए। इसके जरिए बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

राहत कैंप में व्यवस्थाओं का लिया जायजा

कलेक्टर ने शासकीय हाई स्कूल निमांस का भी निरीक्षण किया, जहां बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने अधिकारियों को राहत कैंप में रह रहे लोगों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिला पंचायत के सीईओ कमलेश कुमार भार्गव, एसडीएम शुभम शर्मा, संबंधित तहसीलदार समेत अन्य अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

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