Mauganj Devtalab Temple Parking Fight: मऊगंज जिले के प्रसिद्ध देवतालाब शिव मंदिर परिसर में मलमास के आखिरी सोमवार को कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ती नजर आईं। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद कुछ लोगों ने दो युवकों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आरोप है कि पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई और काफी देर तक पुलिस मूकदर्शक बनी रही। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, नईगढ़ी क्षेत्र के दो युवकों की पार्किंग स्टैंड के कर्मचारियों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर पार्किंग व्यवस्था से जुड़े 8 से 10 लोगों ने दोनों युवकों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावरों ने युवकों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के दौरान मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। अचानक हुई मारपीट से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। महिलाएं और बच्चे जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। आरोप है कि हमले का नेतृत्व नित्यानंद शुक्ला नामक व्यक्ति कर रहा था, जिसका पूर्व में भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस वाहन मौके पर मौजूद था और सायरन भी बज रहा था लेकिन हमलावरों के खिलाफ तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि बीच-बचाव के दौरान भी हमलावर बेखौफ होकर लाठियां चलाते रहे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि देवतालाब मंदिर परिसर की पार्किंग में लंबे समय से अवैध वसूली और दबंगई की शिकायतें मिलती रही हैं। कई बार प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी भी दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि इसी लापरवाही का नतीजा है कि अब खुलेआम श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं।
यह भी पढ़ें: MP News: बुरहानपुर में 'हथौड़े' वाले रहस्यमयी पोस्टरों का पर्दाफाश, CSP गौरव पाटिल के कड़े एक्शन से मचा हड़कंप
फिलहाल घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पर टिकी हैं कि आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। देवतालाब जैसे आस्था के बड़े केंद्र में हुई इस घटना ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।