Saurabh Sharma Bail: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को करीब 18 महीने बाद नियमित जमानत दे दी है। फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद सौरभ शर्मा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सशर्त रिहाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहाई का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच एजेंसी चार्जशीट भी पेश कर चुकी है। ऐसे में आगे की जांच के लिए आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट आरोप तय कर चुका है और अब मामला साक्ष्यों और गवाहों की सुनवाई के चरण में है।
जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सौरभ शर्मा करीब 18 महीने से जेल में हैं, जबकि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने यह भी माना कि मामले में गवाहों और दस्तावेजों की संख्या काफी अधिक है, जिससे मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना कम है। केवल ट्रायल लंबा चलने के आधार पर किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। सौरभ शर्मा को ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई में नियमित रूप से उपस्थित रहना होगा। इसके अलावा वह किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे। न्यायालय की अनुमति के बिना उन्हें देश छोड़ने की भी अनुमति नहीं होगी।
इससे पहले सौरभ शर्मा की दो नियमित जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां से याचिका वापस लेकर दोबारा आवेदन करने की छूट मिली थी। बाद में पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए नई जमानत याचिका दायर की गई। इससे पहले ईडी ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई थी कि आरोपी रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है।
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गौरतलब है कि भोपाल के मेंडोरी जंगल में छापेमारी के दौरान एक कार से 52 किलो सोना और करीब 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई की थी। जांच पूरी होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।