

ED Annual Report 2024-25: भोपाल में RTO के पूर्व आरक्षक Saurabh Sharma की काली कमाई के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है । प्रवर्तन निदेशालय (ED ) ने अपनी सालाना रिपोर्ट में खुलासा किया कि, लोकायुक्त पुलिस ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके चलते आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिली थी।
ED की सालाना लीगल रिपोर्ट में उल्लेख किया कि, भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई के बावजूद समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के कारण सौरभ शर्मा को 1 अप्रैल को डिफॉल्ट जमानत मिली थी। हालांकि, ED की सख्त जांच के चलते वो जेल से बाहर नहीं आ सका। बाद में हाईकोर्ट ने भी ईडी की कार्रवाई के खिलाफ दायर उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
रिपोर्ट के अनुसार सौरभ शर्मा ने भोपाल स्थित ईडी कार्यालय द्वारा वर्ष 2024 में दर्ज ईसीआईआर के संबंध में बीएनएसएस की धारा 483 तथा पीएमएलए 2002 की धारा 3 और 4 के तहत नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। वह 10 फरवरी 2025 से हिरासत में है।, सौरभ शर्मा ने भोपाल स्थित ईडी कार्यालय में साल 2024 में दर्ज ईसीआईआर के संबंध में बीएनएसएस की धारा 483 और पीएमएलए 2002 की धारा 3 और 4 के तहत नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। वो 10 फरवरी 2025 से हिरासत में है।
ED के इस खुलासे ने न सिर्फ मामले की जांच पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ये संकेत भी दिये हैं कि, समयबद्ध कार्रवाई में चूक किस तरह आरोपियों को कानूनी राहत दिला सकती है।
अपनी वार्षिक लीगल रिपोर्ट में ईडी ने कहा है कि जमानत के लिए आवेदन करने वाले सौरभ शर्मा ने शैल कंपनियों, असुरक्षित ऋणों और वित्तीय लेनदेन का उपयोग करके लगभग ₹ 108 करोड़ की अपराधिक आय अर्जित की है। साथ ही इनकम के सोर्स छिपाकर पैसे इधर-उधर किए हैं।
लोकायुक्त पुलिस ने 17 दिसम्बर 2024 को आरटीओ के पूर्व आरक्षक शर्मा के अरेरा कालोनी स्थित ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपए नकद और अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए थे। इसके बाद 18 और 19 दिसंबर की दरम्यानी रात राजधानी के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार में 51.8 किलो गोल्ड और 11 करोड़ रुपए कैश मिला था।