MP High Court On Compassionate Appointment: जबलपुर हाईकोर्ट ने विभाग की ओर से याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि मामले पर लागू नियमों के अनुसार दोबारा विचार कर निर्णय लिया जाए।
बेटियों के पैतृक संपत्ति पर अधिकारों से जुड़ा यह मामला बालाघाट निवासी दीप्ति बिसेन से जुड़ा है। उनके पिता शासकीय प्राथमिक स्कूल पुनी में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान 16 जून 2013 को उनका निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की ओर से दीप्ति को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए आवेदन किया गया था।
विभाग ने 2014 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला देते हुए आवेदन को खारिज कर दिया। विभाग का तर्क था कि विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ विशेष परिस्थितियों में तभी दिया जा सकता है जब बेटी इकलौती संतान हो, इसके बाद याचिकाकर्ता ने विभाग के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
शिक्षा विभाग ने 2014 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला देते हुए आवेदन को खारिज कर दिया। विभाग का तर्क था कि विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ विशेष परिस्थितियों में तभी दिया जा सकता है जब बेटी इकलौती संतान हो, इसके बाद याचिकाकर्ता ने विभाग के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ में हुई।हाईकोर्ट ने मीनाक्षी दुबे बनाम मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड मामले में हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के फैसले का उल्लेख किया।
वर्ष 2020 के उस फैसले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति के विचार से बाहर रखने वाली नीति को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार के विपरीत माना था। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि विवाहित बेटी को स्वतः अनुकंपा नियुक्ति मिल जाएगी। उसकी पात्रता और अन्य शर्तों का निर्धारण नियमों के अनुसार ही किया जाएगा।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि विवाहित महिलाओं को अनुकंपा नियुक्ति के विचार से पूरी तरह बाहर रखने वाली व्यवस्था समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के मामले पर नियमों के तहत नए सिरे से विचार कर निर्णय लिया जाए। यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां विवाहित बेटियों के अनुकंपा नियुक्ति के दावों को केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर खारिज कर दिया जाता है।