जबलपुर में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया) 
जबलपुर

जबलपुर: मालवीय चौक विवाद ने पकड़ा तूल, कांग्रेस का एसपी ऑफिस घेराव; थाना प्रभारी पर FIR की मांग

Jabalpur Congress Protest: जबलपुर के मालवीय चौक पर कांग्रेस प्रदर्शन का विवाद गहराया, नेता आलोक मिश्रा पर एफआईआर के बाद कार्यकर्ताओं ने घेरा एसपी दफ्तर, टीआई पर भी कार्रवाई की मांग।

सजल रघुवंशी

Congress Protest In Jabalpur: जबलपुर में दो दिन पहले मालवीय चौक पर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय का घेराव कर थाना प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई।

दरअसल, दो दिन पहले राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में जबलपुर के मालवीय चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कांग्रेस नेता आलोक मिश्रा और कोतवाली थाना प्रभारी मानस द्विवेदी के बीच तीखी बहस हो गई थी। विवाद इतना बढ़ा कि आलोक मिश्रा पर थाना प्रभारी की कॉलर पकड़ने और धक्का देने का आरोप लगा। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने आलोक मिश्रा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

एकपक्षीय कार्यवाही के लगे आरोप

एफआईआर में शासकीय कार्य में बाधा समेत अन्य धाराएं शामिल किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताया। कांग्रेस पार्टी के नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने केवल कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई की, जबकि पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि कोतवाली थाना प्रभारी मानस द्विवेदी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

धरना प्रदर्शन कौन सा शासकीय कार्य होता है?

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जिस समय प्रदर्शन हो रहा था, उस दौरान ऐसा कौन-सा शासकीय कार्य चल रहा था, जिसमें बाधा पहुंचने का आरोप लगाकर शासकीय कार्य में बाधा की धाराएं लगा दी गईं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और इस तरह की धाराओं का इस्तेमाल विरोध की आवाज दबाने के लिए नहीं होना चाहिए।

कानून व्यवस्था बनाकर रखना भी शासकीय कार्य

वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष जाखड़ का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना भी शासकीय कार्य की श्रेणी में आता है, ऐसे में प्रदर्शन के दौरान पुलिस दल के साथ अभद्रता और सरकारी काम में व्यवधान डालने की शिकायत के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

एक हफ्ते में नहीं हुई कार्यवाही तो होगा उग्र आंदोलन

बहरहाल अब यह मामला केवल पुलिस और कांग्रेस के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। कांग्रेस नेताओं ने सत्ता के दबाव में आंदोलन को कुचलने का प्रयास करने के आरोप लगाये हैं साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में कार्यवाही नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

https://youtu.be/rJyvsfEcgg0?si=coOXq4pZPHhfgPN5

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