Bandhavgarh Tiger Death: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर जोन के T-59 बाघ का सोमवार को जबलपुर में दूसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया। बांधवगढ़ में हुए पहले पोस्टमार्टम में बाघ की मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आने के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ इंस्टीट्यूट में दोबारा पीएम किया गया। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई तथा जांच के लिए जरूरी सैंपल सुरक्षित लिए गए हैं।
दरअसल, रविवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र स्थित खेरवा टोला में बाघ ने एक घर में घुसकर परिवार पर हमला कर दिया था। इस हमले में 40 वर्षीय महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई थी।
जानकारी के मुताबिक हमले के बाद बाघ वहां से चला गया था, लेकिन रात में दोबारा उसी घर में पहुंच गया। उस समय परिवार के सदस्य आंगन में सो रहे थे। बाघ ने फिर हमला किया, जिसमें परिवार के दो अन्य सदस्य घायल हो गए। जान बचाने के लिए परिवार के लोग वहां से भाग निकले। इसके बाद बाघ घर के अंदर घुस गया, लेकिन बाहर नहीं निकला।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि बाघ को नियंत्रित करने के लिए डार्टिंग की गई, लेकिन उसके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। टीम ने जब करीब जाकर जांच की तो बाघ लगभग मृत अवस्था में मिला। इसके बाद बाघ को पोस्टमार्टम के लिए पहले बांधवगढ़ ले जाया गया, लेकिन शुरुआती जांच में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसी वजह से बाघ का शव जबलपुर भेजा गया, जहां विशेषज्ञों की टीम ने दोबारा पोस्टमार्टम किया।
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वन विभाग के अनुसार मृत बाघ की पहचान बफर जोन के T-59 के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 8 वर्ष बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब जांच के बाद ही बाघ की मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। सभी कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद मृत बाघ का अंतिम संस्कार जबलपुर के डुमना वन क्षेत्र में किया गया। वन विभाग ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है।