धनतेरस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बने दुकानदार।
इंदौर की पुश्तैनी ‘काकी जी की दुकान’ पर पहुंचे मंत्री।
ग्राहकों को खुद सामान तौलकर बेचा किराना।
70 साल से ज्यादा पुरानी है विजयवर्गीय परिवार की दुकान।
Indore Minister At Ancestral Grocery Shop: इंदौर में धनतेरस के मौके पर एक बार फिर राजनीति के गलियारों से निकलकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दुकानदार की भूमिका में नजर आए। हर साल की तरह इस बार भी वे अपनी पुश्तैनी किराना दुकान काकी जी की दुकान पर पहुंचे। यहां उन्होंने न सिर्फ ग्राहकों से मुलाकात की, बल्कि खुद सामान तौला और उन्हें किराना सामग्री बेची।
मंत्री को अपने बीच इस अंदाज में देखकर दुकान पर आने वाले ग्राहक भी उत्साहित नजर आए। धनतेरस पर अपनी पुरानी दुकान पहुंचकर उन्होंने परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया।
इंदौर शहर की यह दुकान सिर्फ एक किराना व्यवसाय नहीं, बल्कि विजयवर्गीय परिवार की विरासत और पुरानी यादों से जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि यह दुकान करीब 70 साल से भी अधिक पुरानी है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की माताजी अयोध्या देवी विजयवर्गीय इस दुकान को संभाला करती थीं। इलाके के लोग उन्हें प्यार से काकी जी कहकर बुलाते थे। इसी वजह से दुकान का नाम भी काकी जी की दुकान पड़ गया। आज भी यह नाम इलाके में अपनी अलग पहचान रखता है।
कैलाश विजयवर्गीय के लिए यह दुकान केवल एक पुरानी पारिवारिक संपत्ति नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और मां की स्मृतियों से जुड़ने का भावनात्मक जरिया है। उन्होंने इस परंपरा को लेकर कहा कि कुछ परंपराएं समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि उनका महत्व हर साल और बढ़ता जाता है। धनतेरस पर दुकान पहुंचना और अपनों के बीच समय बिताना उनके लिए ऐसी ही आत्मीय परंपरा है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हर साल धनतेरस के अवसर पर अपनी पुश्तैनी दुकान पहुंचते हैं। इस दौरान वे ग्राहकों को खुद सामान तौलकर देते हैं और पुराने परिचितों से मुलाकात करते हैं। उन्होंने कहा कि दुकान की देहरी पर कदम रखते ही पुरानी स्मृतियां ताजा हो जाती हैं। यहां परिवार की विरासत और पीढ़ियों का अपनापन महसूस होता है।