इंदौर में प्रशासन का एक्शन (सोर्स- सोशल मीडिया) 
इंदौर

इंदौर: सार्वजनिक शौचालय को बदलकर बनाया गया प्रेमाश्रय आश्रम, प्रशासन की जांच में खुली कई पोल

Indore Administration Big Action: इंदौर में पुराने सार्वजनिक शौचालय में अवैध रूप से चल रहे वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से मारपीट का वीडियो वायरल, हरकत में आए प्रशासन ने 31 बुजुर्गों को किया रेस्क्यू।

सजल रघुवंशी

Indore Administration Action On Prem Ashray Ashram: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। मारीमाता चौराहे के पास संचालित एक कथित वृद्धाश्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई।

वायरल वीडियो में एक नाबालिग बुजुर्गों के साथ मारपीट करता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आते ही प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच के बाद सभी बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है, जबकि आश्रम को सील कर संचालिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

पुराने सार्वजनिक शौचालय में चल रहा था कथित वृद्धाश्रम

प्रशासनिक जांच में पता चला कि जिस स्थान पर 31 बुजुर्गों को रखा गया था, वह नगर निगम की जमीन पर बना एक पुराना सार्वजनिक शौचालय था। इसी परिसर को कथित तौर पर वृद्धाश्रम के रूप में संचालित किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि संस्था के पास वृद्धाश्रम संचालित करने की न तो वैध अनुमति थी और न ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे। नियमों की अनदेखी करते हुए लंबे समय से यहां बुजुर्गों को रखा जा रहा था। जांच पूरी होने के बाद सभी 31 बुजुर्गों को सुरक्षित निकालकर शासकीय निराश्रित आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया।

संचालिका पर एफआईआर, बोर्ड पर मंत्री का नाम होने से उठे सवाल

मामले में कथित वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आश्रम के बाहर लगे बोर्ड पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम संरक्षक के रूप में लिखा हुआ था। हालांकि सामाजिक न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित संस्था की ओर से विभाग में मान्यता या पंजीयन के लिए कोई आवेदन ही प्राप्त नहीं हुआ था। ऐसे में बिना वैध अनुमति संस्था का संचालन होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

बिना अनुमति कैसे चलता रहा आश्रम, प्रशासन ने शुरू की जांच

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि बिना किसी सरकारी अनुमति और पंजीयन के यह कथित वृद्धाश्रम इतने लंबे समय तक कैसे संचालित होता रहा। वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर जो भी व्यक्ति या अधिकारी लापरवाही या अनियमितता का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आश्रम को सील कर दिया गया है और सभी बुजुर्गों की सुरक्षा एवं देखभाल की जिम्मेदारी शासन ने अपने हाथ में ले ली है।

https://youtu.be/LYGnm_9AfmU?si=jDaeePXKUNoUkF4D

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