Indore Jhanki Chalo Samaroh : इंदौर में गणेश उत्सव से जुड़ी 103 साल से अधिक पुरानी झांकी परंपरा शुक्रवार को एक बार फिर जीवंत होगी। शहर में आज 22 झांकियों का भव्य कारवां निकलेगा। शाम को डीआरपी लाइन चौराहे से झांकियों का चल समारोह शुरू होगा। इसे लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह है और मिल परिसरों में कई दिनों से चल रही तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।
इंदौर की झांकियों का इतिहास एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। सार्वजनिक गणेश उत्सव के दौरान शहर की विभिन्न मिलों, संस्थाओं और संगठनों की ओर से झांकियां निकालने की परंपरा शुरू हुई थी। समय के साथ इन झांकियों ने इंदौर की सांस्कृतिक पहचान में खास जगह बना ली है। इस बार भी धार्मिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों को अलग-अलग थीम के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।
इस बार झांकियों में नई पीढ़ी और बदलते समय की झलक भी देखने को मिलेगी। इंदौर नगर निगम की झांकी में ‘जेन जी’ का जिक्र किया गया है। इसके जरिए युवा पीढ़ी से जुड़े विषयों को झांकी के माध्यम से सामने लाने की कोशिश की गई है। इससे पारंपरिक आयोजन में मौजूदा दौर के विषयों का रंग भी नजर आएगा।
चल समारोह में झांकियां निर्धारित क्रम के अनुसार आगे बढ़ेंगी। सबसे पहले खजराना गणेश मंदिर की झांकी निकलेगी। इसके बाद शास्त्री कॉर्नर, आईडीए और नगर निगम सहित अलग-अलग मिलों और संस्थाओं की झांकियां कारवां में शामिल होंगी। निर्धारित क्रम के चलते पूरे चल समारोह को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
झांकियों को तैयार करने का काम मिल परिसरों में कई दिनों से चल रहा था। कलाकारों और कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर विशालकाय झांकियों को अंतिम रूप दिया है। इनमें आकर्षक विद्युत सजावट के साथ चलित मॉडल और अलग-अलग विषयों पर आधारित दृश्य देखने को मिलेंगे। झांकियों की भव्यता को लेकर आयोजकों ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इंदौर में गणेश उत्सव के झांकी समारोह में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और समसामयिक मुद्दों को भी जगह दी गई है। अलग-अलग थीम के जरिए लोगों को संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। बड़ी और आकर्षक झांकियों को देखने के लिए शहरवासियों के बड़ी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है। एक बार फिर यह आयोजन इंदौर की ऐतिहासिक परंपरा, कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाएगा।