भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दस्तावेज पेश करने के लिए दिया 4 सप्ताह का समय।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में उपलब्ध मामले से जुड़े रिकॉर्ड सभी पक्षों को मुहैया कराने का निर्देश दिया।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से कई अधिवक्ता सुनवाई में रहे उपस्थित।
Dhar Bhojshala Hearing In Supreme Court: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले को लेकर गुरुवार में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने सभी पक्षों को अपने दस्तावेज और जरूरी रिकॉर्ड पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने हाई कोर्ट में उपलब्ध मामले से संबंधित रिकॉर्ड सभी पक्षों को मुहैया कराने की बात भी कही है। इस निर्देश के बाद अब संबंधित पक्षों को निर्धारित समयसीमा में अपने दस्तावेज तैयार कर अदालत के सामने रखने होंगे।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में संगठन से जुड़े चार प्रकरणों की सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कई अधिवक्ता उपस्थित रहे। इनमें हरिशंकर जैन, रंजना अग्निहोत्री, विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी, रोहित शुक्ला और देवेंद्र नागर शामिल थे। गोयल ने कहा कि संगठन का न्यायिक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापना के संकल्प को भी दोहराया। हालांकि, गुरुवार की सुनवाई में अदालत की ओर से सभी पक्षों को दस्तावेज पेश करने के लिए समय दिया गया है।
धार भोजशाला में पूजा और नमाज को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद परिसर में नियमित पूजा की व्यवस्था जारी है। वहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग पिछले कुछ समय से अपने घरों या स्थानीय मस्जिदों में नमाज अदा कर रहे हैं। 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अंतरिम व्यवस्था के तहत परिसर के समीप स्थित भूमि पर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की व्यवस्था तय की गई थी। इसके बाद प्रशासन और मुस्लिम पक्ष के बीच बैठक में इसी स्थान पर नमाज अदा करने पर सहमति बनी थी।
धार की भोजशाला को मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों में गिना जाता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने देवी सरस्वती को समर्पित इस परिसर का निर्माण कराया था। इसे संस्कृत भाषा, साहित्य, दर्शन और शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जाता है। जैन ग्रंथ प्रबंध चिंतामणि में भी राजा भोज की विद्वत्ता और साहित्यिक योगदान का उल्लेख मिलता है। ऐतिहासिक महत्व के साथ धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति को लेकर यह परिसर लंबे समय से न्यायिक विवाद का विषय बना हुआ है।