Highlights :
इंदौर की भोजशाला विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित।
मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को नियमित पूजा का अधिकार दिया था।
14 जुलाई के अंतरिम निर्देश के बाद जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्देशों पर दोनों पक्षों की नजर रहेगी।
Bhojshala case Supreme Court hearing : इंदौर की भोजशाला विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई प्रस्तावित है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल 5 याचिकाओं में हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी गई है। इस फैसले में हिंदू पक्ष को नियमित पूजा का अधिकार दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और आगे आने वाले निर्देशों पर सभी की नजर रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई 2026 के अंतरिम निर्देश के बाद भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। इसके तहत भोजशाला के पीछे खसरा नंबर 612 पर नमाज की व्यवस्था तय की गई। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम तौर पर परिसर के पास अलग स्थान पर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति देने और दोनों पक्षों के धार्मिक आयोजनों के दौरान शांति बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
एमपी के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर का मामला लंबे समय से चर्चा में है। एमपी हाई कोर्ट के आदेश के बाद यहां पर नियमित पूजा जारी है जबकि मुस्लिम पक्ष पिछले कुछ समय से अपने घरों या स्थानीय मस्जिदों में नमाज अदा कर रहा है। 30 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत भोजशाला परिसर के समीप स्थित भूमि पर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने की व्यवस्था तय की थी। इसके बाद प्रशासन और मुस्लिम पक्ष के बीच हुई बैठक में उक्त स्थल पर नमाज अदा करने पर सहमति बनी थी।
धार भोजशाला का इतिहास कई परतों में फैला हुआ है। जैन ग्रंथ प्रबंध चिंतामणि में परमार वंश के प्रसिद्ध शासक राजा भोज की विद्वत्ता और साहित्यिक योगदान का उल्लेख मिलता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में धार में देवी सरस्वती को समर्पित भोजशाला का निर्माण कराया था। इसे संस्कृत भाषा, साहित्य, दर्शन और शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जाता है।
धार प्राचीन मालवा की राजधानी रहा है। राजा भोज के शासनकाल में इस क्षेत्र में शिक्षा, कला, साहित्य और धार्मिक गतिविधियों को संरक्षण मिला। ऐतिहासिक परंपराओं में धार का संबंध अनेक विद्वानों और साहित्यकारों से जोड़ा जाता है। भोजशाला को इसी समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। भोजशाला को लेकर विवाद के बीच इसके ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक पहचान पर भी लगातार चर्चा होती रही है। ये स्थल मालवा की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।