Damoh School Building Quality: दमोह जिले के हटा विकासखंड के हिनौता गांव में नव निर्मित स्कूल भवन के लोकार्पण समारोह के दौरान उस समय माहौल गर्मा गया, जब भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष गोपाल पटेल ने मंच से ही भवन निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। करीब 1 करोड़ 23 लाख रुपये की लागत से बने स्कूल भवन को लेकर उन्होंने निर्माण कार्य को घटिया बताते हुए ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हटा विधायक उमा देवी खटीक, कैबिनेट दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।
अपने संबोधन में गोपाल पटेल ने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य कराना चाहती है, लेकिन कुछ ठेकेदार और अधिकारी उसकी मंशा पर पानी फेर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई सरकारी भवन गुणवत्ता से समझौता कर बनाए जा रहे हैं, जिस पर जनप्रतिनिधियों को भी सजग रहने की जरूरत है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अंग्रेजों के समय बने भवन आज भी 100 साल बाद मजबूती से खड़े हैं, लेकिन आज बनने वाले भवन 10-20 साल भी चल जाएं तो बड़ी बात होगी।" उनके इस बयान के बाद समारोह में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कार्यक्रम के शिलालेख और आमंत्रण पत्र में जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम पटेल का नाम नहीं होने पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बताया।
जानकारी के अनुसार, स्कूल भवन का निर्माण लोक निर्माण विभाग (भवन शाखा) द्वारा कराया गया है। इसी एजेंसी के पास क्षेत्र में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण की जिम्मेदारी भी है। बताया जा रहा है कि सांदीपनि विद्यालय हटा के निर्माण से जुड़े ठेकेदार को पहले अनियमितताओं के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। वहीं विभाग में उपयंत्री का पद रिक्त होने और एसडीओ के तबादले के बाद निर्माण कार्यों की निगरानी भी प्रभावित बताई जा रही है।
मंच से उठे इस मुद्दे पर हटा विधायक उमा देवी खटीक ने भी भवन की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक भवन में आवश्यक सुधार कार्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक उसका हैंडओवर स्वीकार न किया जाए। विधायक ने कहा कि सरकार की राशि का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।
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लोकार्पण समारोह में सार्वजनिक रूप से उठे इस मुद्दे के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, विभागीय निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग भवन में सुधार कराता है या पूरे मामले की जांच कराई जाती है।
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