Damoh 108 Ambulance Delivery Case : दमोह जिले में एक बार फिर 108 एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हटा ब्लॉक के पिपरिया मिश्र गांव की गर्भवती महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि निजी वाहन से अस्पताल ले जाते समय महिला की रास्ते में ही डिलीवरी हो गई और जन्म के महज पांच मिनट बाद नवजात शिशु की मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार पिपरिया मिश्र गांव निवासी 22 वर्षीय रोशनी लोधी को सोमवार रात से प्रसव पीड़ा शुरू हुई। महिला के पति टंडन सिंह लोधी ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया गया। कॉल सेंटर से 25 मिनट में एंबुलेंस पहुंचने का आश्वासन मिला, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची।
पति का आरोप है कि दोबारा संपर्क करने पर भी मदद नहीं मिली। बाद में उन्हें बताया गया कि फिलहाल कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। इसके बाद मजबूरी में भटिया गांव से निजी वाहन किराए पर लेकर महिला को हटा सिविल अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक लुहारी गांव के पास रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई। नवजात ने जन्म तो लिया, लेकिन करीब पांच मिनट बाद उसकी मौत हो गई। सुबह करीब छह बजे हटा सिविल अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। फिलहाल महिला का इलाज अस्पताल में जारी है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने पर वहां दो 108 एंबुलेंस खड़ी थीं। उनका सवाल है कि यदि एंबुलेंस उपलब्ध थीं तो समय पर सेवा क्यों नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद नवजात की जान बच सकती थी। महिला के ससुर कोमल सिंह लोधी ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें परिजन अपनी पीड़ा और आरोप रखते दिखाई दे रहे हैं।
ये भी पढ़ें : उज्जैन में बेटी का प्रेम विवाह गुजरा नागवार: परिजनों ने कर दिया प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार, गोरनी का भी आयोजन
गौरतलब है कि इससे पहले दमोह के जबेरा ब्लॉक के बमोरी गांव में भी 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचने का मामला सामने आया था। उस दौरान गर्भवती महिला ने यात्री प्रतीक्षालय में ही बच्चे को जन्म दिया था। जांच के बाद 108 सेवा संचालित करने वाली कंपनी पर ₹2.35 लाख का जुर्माना लगाया गया था। इस मामले में फिलहाल स्वास्थ्य विभाग या 108 एंबुलेंस सेवा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि जांच में परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही माना जाएगा।