Chhindwara Seized Vehicles : छिंदवाड़ा जिले के अलग-अलग थाना परिसरों में पिछले कई महीनों से बड़ी संख्या में ट्रैक्टर, ट्रक और डंपर खड़े हैं। ट्रक-ट्रैक्टर एसोसिएशन का दावा है कि खनन और अवैध परिवहन के मामलों में कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए करीब 400 से 500 वाहन अभी भी पुलिस की अभिरक्षा में खड़े हैं। गुरुवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन ने मांग की है कि खनिज विभाग जब्त वाहनों के मामलों में जल्द कानूनी कार्रवाई पूरी करे और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहनों को उनके मालिकों को सौंपा जाए। पदाधिकारियों का आरोप है कि खनिज विभाग के अलावा परिवहन विभाग की ओर से भी कार्रवाई की जाती है, जिससे वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने परिवहन विभाग की कार्रवाई पर भी रोक लगाने की मांग की है।
ट्रक-ट्रैक्टर एसोसिएशन का कहना है कि अवैध परिवहन के मामले में जब्त किसी भी वाहन पर अधिकतम आठ दिनों के भीतर जरूरी कानूनी कार्रवाई पूरी होनी चाहिए। पदाधिकारियों के मुताबिक प्रदेश के दूसरे जिलों में कई मामलों में तीन दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, जबकि छिंदवाड़ा जिले में कुछ वाहन महीनों से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि वाहनों के लंबे समय तक थानों में खड़े रहने से मालिकों और वाहन चालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। वाहन मालिकों पर बैंक की किश्त जमा करने का दबाव बना रहता है, जबकि वाहन नहीं चलने से आमदनी बंद हो जाती है। वहीं, वाहन चालकों के परिवार के भरण-पोषण पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार वैध रॉयल्टी होने के बावजूद वाहनों को रोककर थाने में खड़ा कर दिया जाता है। संगठन ने ऐसे वाहनों को तत्काल छोड़ने की मांग की है। साथ ही रेत, गिट्टी और पुराव की खदानों के ठेकेदारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि हर ट्रिप में वाहन में लोड की गई सामग्री की मात्रा के अनुसार वैध रॉयल्टी उपलब्ध कराई जाए।
पदाधिकारियों का कहना है कि यदि खदान संचालक वाहन मालिकों को नियमानुसार रॉयल्टी उपलब्ध नहीं कराते हैं तो कार्रवाई वाहन मालिकों के बजाय संबंधित खदान संचालकों पर भी होनी चाहिए। एसोसिएशन ने प्रशासन से जब्त वाहनों के मामलों का जल्द निराकरण करने और कार्रवाई की स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की है।