छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में लगी आग, एक नवजात बच्ची की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया)
छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा: जिला अस्पताल के NICU में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, 3 नवजात झुलसे; जबलपुर ले जाते समय 1 बच्ची की मौत

Chhindwara Hospital NICU Fire: जिला अस्पताल के एनआईसीयू में देर रात शार्ट सर्किट से भीषण हादसा, प्लग में स्पार्किंग के बाद लगी आग की चपेट में आए 3 नवजात बच्चे, जबलपुर ले जाते समय 1 नवजात बच्ची की मौत।

मनीष तिवारी, सजल रघुवंशी

Chhindwara Hospital Short Circuit Fire: छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में शुक्रवार देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एक प्लग में शॉर्ट सर्किट होने के बाद आग भड़की और इसकी चपेट में एक ही डोली में रखे तीन नवजात बच्चे आ गए।

तीनों की उम्र करीब 6 से 12 दिन के बीच बताई जा रही है। आग लगने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। एनआईसीयू में उस समय 20 से अधिक नवजात और तीन स्टाफ सदस्य मौजूद थे। हालांकि, आग केवल एक यूनिट तक सीमित रही।

तीनों बच्चों को जबलपुर किया गया रेफर

आग की घटना के बाद अस्पताल के स्टाफ ने तत्काल अग्निशामक यंत्र की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया और बच्चों को डोली से बाहर निकाला। तीनों नवजातों को प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद सुबह करीब 5 बजे उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टर कंचन दुबे के मुताबिक, बच्चों के कितने प्रतिशत झुलसने की स्थिति है, यह तत्काल स्पष्ट नहीं था। बच्चों को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती थी और जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें जबलपुर भेजा गया। रास्ते में एक बच्ची की मौत हो गई।

जन्म के कुछ घंटों बाद ही एनआईसीयू में भर्ती हुई थी बच्ची

मृत बच्ची के पिता आदित्य वर्मा किशनपुर चांद के रहने वाले हैं। उनके मुताबिक, प्रसव के लिए उनकी पत्नी को तीन दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे उन्होंने बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के बाद इंफेक्शन के चलते तीनों नवजातों को एनआईसीयू में भर्ती किया गया था। परिजनों के मुताबिक, आग सीधे बच्ची की ओर लगी, जिसके चलते वह बाकी दोनों बच्चों की तुलना में अधिक झुलस गई। पुलिस ने भी अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

परिजनों ने इलाज का खर्च उठाने की मांग की

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, अस्पताल में नियमानुसार पहले फायर सेफ्टी ऑडिट हो चुका है। जिस डोली में बच्चे रखे थे, उसमें प्लास्टिक का टब था और बच्चों को कपड़े से ढंककर रखा गया था। शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी के बाद प्लास्टिक और कपड़े ने आग पकड़ ली। घटना के बाद एनआईसीयू की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों ने प्रशासन से जबलपुर में बच्चों के इलाज का खर्च उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बाहर इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल है। अस्पताल प्रबंधन अब आग लगने के कारणों और सुरक्षा इंतजामों की भी जांच कर रहा है।

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