Chhatarpur Bulldozer Action Dispute: छतरपुर के पुरानी स्टेट बैंक क्षेत्र में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों, व्यापारियों और समाजसेवियों ने मौके पर पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गरीब रथ परिवारों के मकान गिराने पहुंची प्रशासनिक टीम को विरोध के चलते कार्रवाई रोकनी पड़ी और बुलडोजर वापस लौटाना पड़ा।
विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब और कमजोर परिवारों के मकानों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि शहर में ऐसे कई लोग हैं जिन पर समाज में भय और आतंक का माहौल बनाने, सरकारी जमीनों पर कब्जा करने और अवैध निर्माण खड़े करने के आरोप लगते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पहले ऐसे लोगों के अवैध निर्माणों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाए, उसके बाद अन्य मामलों पर कदम उठाया जाए।
मौके पर मौजूद हिंदू संगठनों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि कानून का डंडा केवल गरीबों पर नहीं चलना चाहिए। उनका आरोप था कि प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माणों पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों के पक्ष में सिविल न्यायालय द्वारा डिक्री पारित की जा चुकी है और जिनकी भूमि वैधानिक रूप से घोषित है, उनके मकानों पर भी तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे न्यायिक आदेशों की अनदेखी बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
विरोध बढ़ने और माहौल गरमाने के बाद प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी। घटना के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जाते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है तो वह निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए।
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एकतरफा कार्रवाई से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, बुलडोजर कार्रवाई को लेकर छतरपुर में सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, जबकि प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।