राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की कठिन परीक्षा, सोर्स :सोशल मीडिया  
भोपाल

MP Congress News: क्रॉस वोटिंग के बीच राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की कठिन परीक्षा, 4 वोटों से साख बचाना चुनौती

MP Congress Cross Voting Fear: 3 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव में दतिया , विजयपुर और बीना के विधायकों ने आलाकमान की टेंशनबढ़ा दी है कांग्रेस के लिए क्रॉस वोटिंग के बीच 1 सीट बचाये रखना चुनौती है

सुधीर दंडोतिया

Madhya Pradesh Political News: मध्य प्रदेश में अगले जून महीने में खाली रही राज्यसभा की तीन सीटों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।चुनाव के लिए जल्द ही अधिसूचना जारी होने की संभावना है, लेकिन चुनाव की आहट से पहले ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खेमे में 'क्रॉस वोटिंग' को लेकर बेचैनी बढ़ गई है।कांग्रेस आलाकमान को डर है कि यदि महज चार विधायक भी छिटके, तो MP Congress के हाथ से एक सुरक्षित सीट भी निकल जाएगी। विधायकों के इस गणित को सुलझाने और अपनी सीट बचाने के लिए पार्टी के भीतर गुप्त मंथन का दौर शुरू हो चुका है।

बीजेपी संख्या बल में काफी आगे

विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के लिहाज से तीन में से दो सीटें सत्तारूढ़ बीजेपी के खाते में जाना पूरी तरह तय माना जा रहा है। बची हुई एक सीट तकनीकी रूप से कांग्रेस के हिस्से में आनी चाहिए। हालांकि, हाल के दिनों में अन्य राज्यों में कांग्रेस विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग और ऐन वक्त पर अनुपस्थित रहने के कड़वे अनुभवों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों ने अपनी ही पार्टी के कुछ 'संदिग्ध' विधायकों पर चुपके से निगरानी रखना शुरू कर दिया है।

तीन विधायकों ने बिगाड़े समीकरण दो  नहीं कर पायंगे पतदान

दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता शून्य किए जाने के बाद अब कांग्रेस के 64 सदस्य विधानसभा में हैं। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता शून्य करने संबंधी निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक तो लगा दी है, लेकिन वह चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।सबसे बड़ा सिरदर्द बीना से कांग्रेस टिकट पर जीतीं विधायक निर्मला सप्रे बनी हुई हैं।

राज्यसभा चुनाव के लिए निर्मला स्प्रे को अपना मानेगी कांग्रेस

निर्मला सप्रे साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद भी कई मौकों पर खुलेआम भाजपा के मंचों पर नजर आ चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने तकनीकी रूप से कांग्रेस से इस्तीफा नहीं दिया है और खुद को कांग्रेस में ही बताती हैं। उनके इस दलबदलू रुख के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है, जिस पर सुनवाई जारी है।कांग्रेस सप्रे के वोट को अपने पक्ष में मानकर नहीं चल रही है, हालांकि रणनीतिक तौर पर प्रदेश पदाधिकारियों ने हाल ही में उनसे संपर्क साधकर कांग्रेस के पक्ष में ही वोट करने का भावुक अनुरोध किया है।

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4 वोट कांग्रेस के लिए बचाये रखना चुनौती

यदि मुकेश मल्होत्रा, राजेंद्र भारती (कानूनी रूप से अयोग्य) और निर्मला सप्रे (संदेहास्पद रुख) को समीकरण से बाहर मान लिया जाए, तो कांग्रेस के पास अपनी तय सीट को बचाने के लिए सिर्फ 4 अतिरिक्त वोटों का ही मार्जिन बचता है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इतने कम अंतर के बीच यदि भाजपा ने कोई बिसात बिछाई या आंतरिक गुटबाजी हावी हुई, तो कांग्रेस के लिए अपनी लाज बचाना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, पूरी कांग्रेस लॉबी 'एक-एक वोट' को सहेजने के लिए किलेबंदी में जुट गई है।

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