MP Youth Voters : भोपाल में यूथ कॉन्क्लेव के बहाने मध्यप्रदेश में युवाओं को साधने की सियासत तेज होती नजर आ रही है। लाल परेड मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की परफॉर्मेंस के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से सीधा संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए। इस पूरे आयोजन के राजनीतिक मायने को लेकर नवभारत लाइव ने वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुधीर दंडोतिया से चर्चा की।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुधीर दंडोतिया के मुताबिक, देश में जेन जी और जेन अल्फा की सक्रियता और प्रभाव लगातार चर्चा में आया है। युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने राजनीतिक दलों का ध्यान इस वर्ग की ओर खींचा है। अब प्रमुख राजनीतिक दल और संगठन युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सुधीर दंडोतिया ने कहा कि कांग्रेस ने हाल में ‘छात्रों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद करने की कोशिश की। इसके बाद बीजेपी और RSS की ओर से भी युवाओं के बीच पहुंच बढ़ाने और नई पीढ़ी से संवाद स्थापित करने के प्रयास तेज हुए हैं। उनका मानना है कि यह बदलाव युवाओं की राजनीतिक ताकत को पहचानने का संकेत है।
राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक, RSS भी अपने पारंपरिक तरीकों के साथ युवाओं तक पहुंचने के लिए नए प्रयोग करता दिखाई दे रहा है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को समझना, उनसे संवाद करना और उन्हें अपने विचारों से जोड़ना है। इसी क्रम में युवाओं को केंद्र में रखकर अलग-अलग स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
भोपाल के लाल परेड मैदान में हुए यूथ कॉन्क्लेव में करीब 20 से 25 हजार युवाओं के शामिल होने की बात कही गई। कार्यक्रम में युवाओं के मनोरंजन के लिए जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की परफॉर्मेंस हुई। हालांकि, कार्यक्रम का सबसे अहम राजनीतिक पहलू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का युवाओं से सीधा संवाद रहा। युवाओं ने मुख्यमंत्री से सवाल किए और उन्होंने उनके जवाब दिए।
सुधीर दंडोतिया के मुताबिक आने वाले चुनावी दौर में मध्यप्रदेश के करीब 1.25 करोड़ युवा वोटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में युवा वर्ग राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ कार्यक्रमों में जुटने वाली भीड़ नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि राजनीतिक दल युवाओं को केंद्र में रखकर लगातार कार्यक्रम और संवाद अभियान कर रहे हैं।
सिर्फ बड़े आयोजनों से युवा मतदाताओं का समर्थन किसी एक दल की ओर जाएगा, यह अभी कहना मुश्किल है। युवा वोट कई मुद्दों से प्रभावित हो सकता है। रोजगार, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, भविष्य के अवसर और सरकार की योजनाएं युवा मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए कार्यक्रमों के साथ ठोस मुद्दों और नीतियों पर भी युवाओं को भरोसा दिलाना चुनौती होगी।
भोपाल का यूथ कॉन्क्लेव युवाओं को लेकर बदलती राजनीतिक रणनीति की तस्वीर पेश करता है। कांग्रेस के बाद बीजेपी और RSS भी नई पीढ़ी के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जेन जी और जेन अल्फा की राजनीतिक पसंद क्या होती है और मध्यप्रदेश में करीब 1.25 करोड़ युवा वोटर आने वाले चुनाव में किस तरह राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं।