MP Governor Mangubhai Patel Tenure : मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर में दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाए। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया।
याचिका जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से सेवानिवृत्त डॉ. एमए खान की ओर से दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था और उनका पांच वर्ष का सामान्य कार्यकाल 8 जुलाई 2026 को पूरा हो गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने अदालत में संवैधानिक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग रखी।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक राज्य में संवैधानिक व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इसी आधार पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अंतरिम रूप से राज्यपाल का प्रभार सौंपने की मांग की गई है। हालांकि, इस मांग पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट को करना है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से संविधान के अनुच्छेद 156 का हवाला दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अनुच्छेद 156 के प्रावधान के अनुसार राज्यपाल पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक उनका उत्तराधिकारी पदभार ग्रहण नहीं कर लेता। ऐसे में इस मामले का एक प्रमुख संवैधानिक सवाल यही है कि मौजूदा स्थिति में इस प्रावधान की व्याख्या किस तरह की जाए।
मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। फिलहाल अदालत की ओर से अंतिम आदेश नहीं आया है। इसलिए राज्यपाल के पद को लेकर याचिका में की गई मांग और मौजूदा संवैधानिक स्थिति पर अंतिम स्थिति हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 16 सितंबर को लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू हो रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी राज्यपाल को दी।
राज्य सरकार के मुताबिक, स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान के तहत 50 लाख से अधिक ग्रामीण हितग्राहियों की संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कर उन्हें अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने की तैयारी है। वहीं ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत 17 सितंबर से होगी। सरकार ने इस अभियान के पहले दिन प्रदेशभर में 58 लाख दीप जलाने की भी तैयारी की है।
राज्यपाल के कार्यकाल और नई नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित होने के बाद अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि याचिका में उठाए गए संवैधानिक सवालों और मुख्य न्यायाधीश को प्रभार देने की मांग पर क्या रुख सामने आता है।