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भोपाल

MP बोर्ड का बड़ा फैसला, 10वी में बेसिक मैथ्स वाले भी 11वीं में चुन सकेंगे गणित; जानें क्यों लिया गया ये निर्णय

MPBSE Class 11th Maths Criteria: एमपी बोर्ड ने 10वीं में बेसिक गणित पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, नए आदेश के तहत अब बेसिक मैथ्स पढ़ने वाले भी 11वीं में मैथ्स ले सकेंगे।

सजल रघुवंशी

MP Board Basic Maths Rule Change 2026: मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब 9वीं और 10वीं कक्षा में बेसिक गणित विषय से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं भी 11वीं कक्षा में गणित विषय लेकर आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। मंडल ने इसके लिए नियमों में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था को इसी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया है। इस संबंध में माशिमं द्वारा आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

अब तक व्यवस्था यह थी कि केवल वही विद्यार्थी 11वीं कक्षा में गणित विषय चुन सकते थे, जिन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में स्टैंडर्ड गणित लिया हो। बेसिक गणित से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को गणित विषय लेने की अनुमति नहीं दी जाती थी। इसके चलते कई छात्र-छात्राएं रुचि होने के बावजूद आगे गणित विषय से अध्ययन नहीं कर पाते थे। नई व्यवस्था लागू होने से अब ऐसे विद्यार्थियों को भी अपनी पसंद के अनुसार गणित विषय चुनने का अवसर मिल सकेगा।

माशिमं के इस फैसले से मिलेगा हजारों छात्रों को लाभ

एमपी बोर्ड के इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलने की संभावना है। कई छात्र-छात्राएं 9वीं और 10वीं कक्षा में गणित विषय कठिन लगने के कारण बेसिक गणित का विकल्प चुन लेते थे लेकिन आगे चलकर उनकी रुचि गणित में विकसित हो जाती थी। हालांकि, पुराने नियमों के चलते उन्हें 11वीं में गणित या विज्ञान संकाय में प्रवेश लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य की पढ़ाई के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिल सकेगा।

इसलिए किया गया इतना बड़ा बदलाव

प्राचार्यों के अनुसार, मध्य प्रदेश के स्कूलों में बेसिक गणित चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या स्टैंडर्ड गणित लेने वाले छात्रों की तुलना में अधिक रहती थी। हालांकि, 10वीं के बाद कई विद्यार्थियों की रुचि विज्ञान संकाय में आगे पढ़ाई करने की होती थी, लेकिन पुराने नियमों के कारण वे 11वीं में गणित विषय नहीं ले पाते थे। विद्यार्थियों की इसी समस्या को देखते हुए नियमों में बदलाव किया गया है, ताकि उन्हें अपनी पसंद और भविष्य की जरूरत के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिल सके।

दो साल पहले शुरू हुआ था यह विकल्प

बता दें कि, स्कूल शिक्षा विभाग ने दो वर्ष पहले 9वीं से बेसिक और स्टैंडर्ड गणित का विकल्प शुरू किया था। दोनों की किताब एक ही थी, लेकिन प्रश्नपत्र अलग होते थे। प्राचार्यों के अनुसार, नए बदलाव से विद्यार्थियों पर विषय चयन का दबाव कम होगा।

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