Mahavir Medical College Committee Dispute: मध्य प्रदेश में सत्ताधारी दल बीजेपी के पूर्व मंत्री जयंत मलैया एक बड़े विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। राजधानी भोपाल में संचालित प्रतिष्ठित महावीर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले में उन पर गंभीर फर्जीवाड़े और समिति पर अवैध कब्ज़े के आरोप लगे हैं।
'जैन सर्वोदय विद्या ज्ञानपीठ समिति, भोपाल' के संस्थापक एवं वैध सदस्यों ने एक सार्वजनिक सूचना जारी कर पूर्व मंत्री की कार्यप्रणाली की पोल खोली है, जिससे उनके राजनीतिक और सामाजिक रसूख पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
समिति के पंजीकृत संविधान के अनुसार, संस्था का अध्यक्ष या सचिव केवल उसी व्यक्ति को बनाया जा सकता है जो समिति का 'संस्थापक सदस्य' हो। नियमों के मुताबिक, किसी भी नए व्यक्ति को संस्थापक सदस्य बनने के लिए 5 करोड़ रुपये की राशि दान में देनी होती है। आरोप है कि जयंत मलैया और सुनील जैन ने इन नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। दोनों न तो समिति के संस्थापक सदस्य हैं और न ही उन्होंने दान की तय राशि दी, फिर भी वे अवैध और मनमाने तरीके से समिति के पदाधिकारी बन बैठे।
मामले की शिकायत होने पर जब शासकीय जांच की गई, तो जयंत मलैया और उनके साथियों की सदस्यता फर्जी पाई गई और उन्हें समिति में अवैध घोषित कर दिया गया। फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के समक्ष विचाराधीन है और न्यायालय द्वारा इस प्रकरण में स्थगन (स्टे) आदेश भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद, समिति पर इनका अवैध नियंत्रण बना हुआ है।
समिति के वैध सदस्यों ने आरोप लगाया है कि ये स्वार्थी तत्व जैन समाज के सम्मानित लोगों को गुमराह कर रहे हैं और अवैध तरीके से बड़ी-बड़ी राशियां लेकर लोगों को समिति का सदस्य और पदाधिकारी बना रहे हैं। इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए संस्थापक सदस्यों ने एक जाहिर सूचना (पब्लिक नोटिस) जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी है कि समिति के वर्तमान अध्यक्ष, सचिव और पूरी कार्यकारिणी पूरी तरह से अवैध है।
समाज के किसी भी व्यक्ति को जयंत मलैया या उनके अनाधिकृत गुट के साथ कोई भी आर्थिक लेन-देन नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन अवैध पदाधिकारियों के साथ किसी तरह का संव्यवहार करता है, तो उसके नुकसान की पूरी जिम्मेदारी उसकी स्वयं की होगी और 'जैन सर्वोदय विद्या ज्ञानपीठ समिति' इसके लिए कतई उत्तरदायी नहीं होगी।इस खुलासे के बाद से ही जैन समाज और स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है और पूर्व मंत्री की भूमिका सवालों के घेरे में है।