

Navbharat Analysis On Amit Shah Nashamukt MP: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 से पहले पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने माताओं और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश के युवाओं के जीवन में नशे के लिए कोई जगह नहीं होगी। अमित शाह ने यह ऐलान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किया और इस ऐलान के बाद पूरे प्रदेश में नशामुक्ति को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है।
वहीं, दूसरी तरफ अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी के विरोध पर पलटवार करते हुए मोदी सरकार के 10 साल के कामकाज का हिसाब भी पेश किया। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या मध्य प्रदेश में शराबबंदी होगी? क्योंकि आसानी से मिलने वाला नशा तो शराब ही है। इसके अलावा कांग्रेस भी शराबबंदी का मुद्दा उठा चुकी है। इस पर नवभारत लाइव के स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया ने अहम विश्लेषण किया।
अमित शाह के नशामुक्त मध्य प्रदेश के लक्ष्य और कांग्रेस के शराबबंदी के मुद्दे पर नवभारत ने वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार सुधीर दंडोतिया से खास बातचीत की। सुधीर दंडोतिया ने कहा कि कांग्रेस ने शराबबंदी का मुद्दा जरूर उठाया है लेकिन मध्य प्रदेश में शराब से मिलने वाला राजस्व सरकार की आय का एक बड़ा हिस्सा है। ऐसे में किसी भी सरकार के लिए प्रदेश में पूरी तरह शराबबंदी लागू करना आसान नहीं होगा।
सुधीर दंडोतिया ने कहा कि शराबबंदी को लेकर राजनीतिक दलों के सामने व्यावहारिक चुनौतियां हैं। यही वजह है कि कांग्रेस भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में शराबबंदी को शामिल करने से बच सकती है। सुधीर दंडोतिया ने स्पष्ट किया कि अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने की जो बात कही है, उसका संबंध मुख्य रूप से ड्रग्स और सूखे नशे से है। इसे सीधे तौर पर शराबबंदी के ऐलान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नवभारत लाइव के इस सवाल पर कि क्या 2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने का अमित शाह का ऐलान एक चुनावी घोषणा है, सुधीर दंडोतिया ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। उन्होंने कहा कि अमित शाह किसी भी लक्ष्य को निर्धारित समयसीमा के साथ पूरा करने की रणनीति पर काम करते हैं। इससे पहले उन्होंने देश से नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य तय किया था और निर्धारित समयसीमा के भीतर इस दिशा में बड़ी कार्रवाई की गई। अब इसी तरह नशे के खिलाफ भी एक स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है।
सुधीर दंडोतिया के मुताबिक, अमित शाह के इस ऐलान को महज चुनावी वादे के तौर पर देखने के बजाय एक निर्धारित लक्ष्य के रूप में समझना चाहिए।
मध्य प्रदेश को 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। इसके लिए ड्रग्स की आपूर्ति पर रोक लगाने, नशे के नेटवर्क को खत्म करने, युवाओं को जागरूक करने और नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के पुनर्वास जैसे मोर्चों पर काम करना होगा।