चर्चा में आईपीएस अनुराग सुजानिया का इस्तीफा, 27 अक्टूबर को सागर एसपी पद से हटाकर पीएचक्यू में किया गया था पदस्थ।
व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर सुजानिया ने सौंपा इस्तीफा।
सुजानिया के कार्यकाल को लेकर स्थानीय लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं।
आईपीएस एसोसिएशन ने सीएम डॉ. मोहन यादव से की मुलाकात।
Sagar SP Transfer After Liquor Tragedy: मध्य प्रदेश में सागर शराब कांड के बाद आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया का तबादला और फिर उनके इस्तीफे की खबर ने प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। एक पुलिस अधिकारी के तबादले के बाद इस्तीफे तक पहुंचे घटनाक्रम को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले पर नवभारत की विशेष चर्चा में वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुधीर दंडोतिया ने कहा कि प्रदेश में लगातार हो रही गंभीर घटनाओं के बीच पहले अधिकारी का तबादला और फिर उनका इस्तीफा चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। यह घटनाक्रम केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस अधिकारियों के मनोबल को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
सागर में अनुराग सुजानिया के कार्यकाल को लेकर भी अब अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सागर के कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके कार्यकाल में अपराधों पर नियंत्रण बनाने की दिशा में बेहतर काम हुआ। ऐसे में उनके तबादले और इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने उनके समर्थन में पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले में हस्तक्षेप करने और उनके फैसले पर पुनर्विचार कराने की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया को 27 अक्टूबर को सागर एसपी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल में एआईजी के पद पर पदस्थ किया गया था। इसके बाद 2 नवंबर को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने त्यागपत्र में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। फिलहाल इस्तीफे को शासन की स्वीकृति मिलना बाकी है।
दरअसल, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में सितंबर में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था। अवैध शराब के कारोबार और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद राज्य सरकार ने सागर के कलेक्टर और एसपी दोनों का तबादला कर दिया था। अनुराग सुजानिया की जगह संजीव कुमार सिन्हा को सागर एसपी की जिम्मेदारी दी गई।
अनुराग सुजानिया इससे पहले मुरैना में भी एसपी रह चुके हैं। साल 2021 में उनके कार्यकाल के दौरान जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत का मामला सामने आया था। उस समय भी उन्हें एसपी पद से हटाया गया था। अब सागर शराब कांड के बाद एक बार फिर उनका तबादला और फिर इस्तीफा चर्चा में है।
इस घटनाक्रम के बीच आईपीएस एसोसिएशन की सक्रियता भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस पूरे मामले पर चर्चा की। वहीं मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की बैठक भी बुलाई, जिसमें प्रदेश की कानून व्यवस्था और शराब माफिया पर अंकुश लगाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
अनुराग सुजानिया के इस्तीफे ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शराब कांड के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई से अधिकारी असहज थे? क्या तबादले के बाद नई जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय इस्तीफा देना उनके व्यक्तिगत फैसले का परिणाम है? और क्या सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें सेवा में बनाए रखने की कोशिश करेगी?
सुधीर दंडोतिया के विश्लेषण के मुताबिक, लगातार गंभीर घटनाओं के बीच एक वरिष्ठ IPS अधिकारी का इस तरह इस्तीफा देना प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और इस्तीफे पर लिया जाने वाला फैसला इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।