Electric Vehicles Policy MP: राजधानी भोपाल का नगर निगम प्रशासन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। भोपाल अब मध्य प्रदेश का पहला ऐसा नगरीय निकाय बनने की राह पर है, जहां शासकीय कार्यों के लिए पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उपयोग किया जाएगा।
निगम प्रशासन ने इस योजना के पहले चरण की तैयारी पूरी कर ली है। इसके तहत निगम के बेड़े में 50 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन शामिल किए जाएंगे। इन वाहनों की निर्बाध सेवा सुनिश्चित करने के लिए शहर के विभिन्न निगम कार्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर 30 नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
योजना के पहले चरण में प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए आयुक्त, अपर आयुक्त, उपायुक्त और सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों को ये इलेक्ट्रिक वाहन आवंटित किए जाएंगे। इन वाहनों के संचालन, रखरखाव और उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने तीन साल के अनुबंध (टेंडर) पर एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी है।
यह पहल मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति-2025 के निर्देशों के अनुरूप है। 27 मार्च 2025 से लागू इस नीति में प्रदेश के सभी सरकारी संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।
नगर निगम के इस प्रयास को और अधिक विस्तार देने के लिए 'भोपाल स्मार्ट सिटी' एक 'ईवी एग्रीगेटर' की भूमिका निभाएगी। स्मार्ट सिटी द्वारा लगभग 2500 इलेक्ट्रिक वाहनों का एक साझा बेड़ा तैयार किया जाएगा। इन वाहनों को शहर के अन्य शासकीय विभागों को लीज मॉडल पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें वाहन खरीदने की लंबी और जटिल प्रक्रियाओं से मुक्ति मिल सकेगी।
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इतना ही नहीं, बीसीएलएल के साथ मिलकर स्मार्ट सिटी प्रशासन शहर के प्रमुख प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्रों पर 70 अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन भी विकसित करेगा, जिससे पूरे शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो सके।