Rajasthan SOG Action Against RKDF University: भोपाल की आरकेडीएफ (आरकेडीएफ) यूनिवर्सिटी एक बार फिर गंभीर आरोपों और जांच के घेरे में है। राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट से जुड़े मामले की जांच के दौरान आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़े संदिग्ध मामलों की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड और दस्तावेज जांच के दायरे में आए।
मामले में राजस्थान की जांच एजेंसी ने जनवरी 2026 में भोपाल स्थित आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी परिसर के साथ गांधी नगर और कोलार क्षेत्र से जुड़े ठिकानों पर जांच की थी। रिपोर्टों के अनुसार, यूनिवर्सिटी से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, जबकि कार्रवाई की आंच यूनिवर्सिटी प्रबंधन तक भी पहुंची। जांच का केंद्र फर्जी मार्कशीट और डिग्री जारी किए जाने के आरोपों से जुड़ा था।
राजस्थान एसओजी पिछले कई वर्षों से फर्जी डिग्री, बैकडेटेड मार्कशीट और भर्ती प्रक्रियाओं में इस्तेमाल हुए संदिग्ध शैक्षणिक दस्तावेजों के मामलों की जांच कर रही है। जून 2026 की रिपोर्टों में भी कई राज्यों के निजी विश्वविद्यालयों और कथित बिचौलियों के जांच के दायरे में होने की बात सामने आई थी। आरोप है कि ऐसे नेटवर्क के जरिए लाखों रुपये लेकर शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे और इनका इस्तेमाल नौकरी व भर्ती प्रक्रियाओं में किया जाता था।
आरकेडीएफ से जुड़े संस्थानों के लिए 2026 लगातार विवादों भरा रहा है। मार्च 2026 में आरकेडीएफमेडिकल कॉलेज पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने नियमों के उल्लंघन और स्टाइपेंड भुगतान संबंधी जानकारी से जुड़े मामले में एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इससे पहले राजस्थान एसओजी की कार्रवाई ने भी यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए थे।
राजस्थान एसओजी की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन डिग्री और मार्कशीट को लेकर जांच की गई, उनमें कथित अनियमितताओं की जड़ आखिर कहां तक फैली है। जांच एजेंसियों की पड़ताल में रिकॉर्ड, दस्तावेज और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।अब देखना होगा कि राजस्थान एसओजी की जांच में आरकेडीएफ से जुड़े इस मामले में आगे कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और क्या जांच की आंच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बाहर तक फैले बड़े शैक्षणिक नेटवर्क तक पहुंचती है।