राजस्थान SOG का बड़ा एक्शन: सीहोर की यूनिवर्सिटी का कुलपति समेत 3 गिरफ्तार, PTI भर्ती में बेची फर्जी डिग्रियां

PTI Recruitment Scam Sehore: सीहोर के निजी विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री रैकेट का बड़ा पर्दाफाश, राजस्थान SOG ने कुलपति मुकेश तिवारी, परीक्षा नियंत्रक और कंप्यूटर ऑपरेटर को किया गिरफ्तार।
Rajasthan SOG arrests Sehore university vice chancellor in fake degree scam
राजस्थान एसओजी की बड़ी कार्रवाई(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Fake Degree Scam Sehore: सीहोर स्थित एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़े कथित फर्जी डिग्री रैकेट के खिलाफ राजस्थान पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान की शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल का खुलासा होने के बाद यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौर और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। अदालत ने तीनों मुख्य आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है।

​यह पूरी कार्रवाई लगभग सात महीने पहले विश्वविद्यालय परिसर और अन्य ठिकानों पर की गई एसओजी की छापेमारी के बाद संभव हो पाई है। उस दौरान जब्त दस्तावेजों और फॉरेंसिक जांच में बड़ा सच उजागर हुआ। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थियों को PTI भर्ती के लिए पात्र बनाने के उद्देश्य से बीपीईड और डीपीईड की फर्जी डिग्रियां पुरानी तारीखों (बैक डेट) में जारी की गई थीं।

​फर्जीवाड़े का पूरा ताना-बाना, भारी धनराशि की वसूली

राजस्थान पुलिस और एसओजी के मुताबिक, अपात्र अभ्यर्थियों से बैक डेट डिग्री उपलब्ध कराने के बदले लाखों रुपए की भारी-भरकम राशि वसूली गई थी। रिमांड के दौरान राजस्थान पुलिस आरोपियों से नेटवर्क में शामिल एजेंटों, फर्जी डिग्री धारक अभ्यर्थियों और वित्तीय लेन-देन के खातों की सघन पूछताछ कर रही है।

​स्थानीय पुलिस को नहीं थी सूचना

सीहोर जिले की स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान एसओजी ने इस कार्रवाई और गिरफ्तारी को लेकर उन्हें पूर्व में कोई आधिकारिक सूचना या दस्तावेज साझा नहीं किए थे। ​तीन दिन की रिमांड के दौरान बरामद कागजात और लेन-देन की फाइलों के आधार पर कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

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पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने में जुटी एसओजी

फिलहाल एसओजी इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने और उन तमाम अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने में जुटी है, जिन्होंने पैसे देकर इन फर्जी डिग्रियों के आधार पर सरकारी नौकरियों में जगह पाने की कोशिश की। एक बार फिर इस घटना ने फर्जी और बैक डेट डिग्रियों का बड़ा खेल उजागर कर दिया है। साथ ही इस मामले में स्थानीय पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की जानकारी न होना कहीं न कहीं जिला प्रशासन पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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