

Vijay Shah Colonel Sofia Qureshi Case : कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार के फैसले के बाद प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का फैसला लिया गया। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अभियोजन की सिफारिश कर चुकी है और प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।
मामला 11 मई 2025 का है। इंदौर जिले के महू स्थित रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए विवादित टिप्पणी की थी। हालांकि बयान में किसी का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन इसे भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिया गया बयान माना गया। मामले ने तूल पकड़ा तो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया था। जांच पूरी होने के बाद SIT ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। मामला लंबे समय से मंजूरी के स्तर पर लंबित था। अब कैबिनेट के फैसले के बाद अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का निर्णय सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, मोहन कैबिनेट में अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के पीछे विजय शाह द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को प्रमुख आधार बनाया गया। हालांकि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी सख्त टिप्पणी कर चुका है। शीर्ष अदालत की पूर्व टिप्पणियों और SIT की सिफारिश के बीच सरकार के ताजा फैसले ने इस मामले को फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है।
सरकार के फैसले के बाद विपक्ष ने भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार मंत्री को बचाने का प्रयास कर रही है, जबकि भाजपा की ओर से इस मामले पर सरकार के फैसले का राजनीतिक विरोध हो रहा है।
कैबिनेट के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। प्रस्ताव राज्यपाल मंगुभाई पटेल के समक्ष जाएगा, जिसके बाद उनके स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी अगली सुनवाई प्रस्तावित है। शीर्ष अदालत राज्य सरकार के फैसले और अभियोजन स्वीकृति से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार कर सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मामले में अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता को लेकर भी न्यायालय के समक्ष सवाल उठ सकता है। SIT यह तर्क रख सकती है कि यदि कथित बयान मंत्री के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन का हिस्सा नहीं था, तो अभियोजन स्वीकृति की अनिवार्यता पर कानूनी परीक्षण किया जा सकता है। ऐसे में कैबिनेट के इनकार के बावजूद विजय शाह से जुड़े इस मामले में कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं मानी जा रही है।