Bhopal PM Awas Project : भोपाल के 12 नंबर मार्केट के पास प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे आवासीय प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। यहां रहने वाले लोगों का आरोप है कि शिफ्ट होने के महज 8-9 महीने के भीतर ही फ्लैट्स में कई तरह की निर्माण संबंधी खामियां सामने आने लगी हैं। कहीं प्लास्टर टूट रहा है तो कहीं दीवारों से पानी रिस रहा है। रहवासियों ने पिलर की मजबूती और दूसरी निर्माण संबंधी अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए हैं।
12 नंबर बस स्टॉप के पास शुरू हुआ यह हाउसिंग प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में शुरू किया गया था। इसकी लागत करीब 247 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रोजेक्ट में 216 MIG, 576 LIG और 1,008 EWS फ्लैट शामिल हैं। इस तरह कुल 1,800 आवास प्रस्तावित हैं। प्रोजेक्ट को तय समय में पूरा किया जाना था, लेकिन निर्माण में देरी को लेकर हितग्राही पहले भी सवाल उठाते रहे हैं।
रहवासियों का कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवार अपनी जिंदगी की बड़ी कमाई घर खरीदने में लगा देता है। ऐसे में अपने घर में शिफ्ट होने के कुछ ही महीनों बाद प्लास्टर टूटने और दीवारों से पानी रिसने जैसी समस्याएं सामने आने से उनकी चिंता बढ़ गई है। उनका आरोप है कि यहां आने के बाद से ही छोटी-बड़ी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।
रहवासियों के मुताबिक, उन्होंने कई बार नगर निगम से शिकायत की है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की तरफ से मौखिक आश्वासन तो मिलता है, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। रहवासियों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जरूरत है।
कॉलोनी की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करने वाला एक और मामला सीढ़ियों से जुड़ा है। रहवासियों का आरोप है कि कुछ जगह सीढ़ियों की रेलिंग के बजाय पानी के नल में इस्तेमाल होने वाले पाइप लगा दिए गए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट में सुरक्षा से जुड़ी ऐसी व्यवस्था सवाल खड़े करती है।
रहवासियों के अनुसार, इमारत की छत पर फायर सेफ्टी के लिए पाइप लगाए गए हैं, लेकिन उनका कनेक्शन नहीं जोड़ा गया है। उनका सवाल है कि अगर भविष्य में आग जैसी आपात स्थिति आती है तो यह व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी। उनका कहना है कि फायर सेफ्टी सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
रहवासियों के मुताबिक, प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में अब तक करीब पांच कंपनियां एक के बाद एक बदल चुकी हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है, लेकिन फ्लैट्स में अभी से कई तरह की परेशानियां सामने आने लगी हैं। ऐसे में वे निर्माण की गुणवत्ता और भविष्य में इमारतों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
भोपाल नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया था। नगर निगम का कुल बजट करीब 3,353 करोड़ रुपये था। वहीं मार्च 2025 में विधानसभा में भोपाल के प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रोजेक्ट्स को लेकर सवाल भी किया गया था। सरकार की ओर से बताया गया था कि नगर निगम भोपाल में AHP घटक के तहत 5,517 आवास बन चुके हैं और 15 स्थलों पर आवासीय योजनाओं का काम जारी है।
रहवासियों की मांग है कि नगर निगम और संबंधित विभाग पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच कराएं। फ्लैट्स की गुणवत्ता, प्लास्टर, पानी के रिसाव, पिलर, सीढ़ियों की रेलिंग और फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच की जाए। उनका कहना है कि जहां भी खामियां हैं, उन्हें निर्माण एजेंसी से ठीक कराया जाना चाहिए। अब रहवासियों की नजर इस बात पर है कि उनकी शिकायतों पर नगर निगम और संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं।