Bhopal Garbage Rules 4 Dustbin Fine: राजधानी भोपाल को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल करने की दिशा में नगर निगम परिषद ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। परिषद ने केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को शहर में पूरी तरह लागू करने की मंजूरी दे दी है। इसके लागू होते ही अब शहर में कचरा प्रबंधन के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
नए नियमों के तहत अब हर घर, दुकान और संस्थान को अपने परिसर में कचरे के लिए अनिवार्य रूप से चार अलग-अलग डस्टबिन रखना होगा। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और घरेलू ई-वेस्ट को अलग-अलग संग्रहित करना जरूरी होगा। गीले कचरे में रसोई का कचरा, सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज और धातु, जबकि सैनिटरी व ई-वेस्ट में घरेलू उपयोग की विशेष वस्तुएं शामिल होंगी।
नगर निगम ने साफ किया है कि यदि कोई नागरिक या संस्थान कचरे की छंटनी नहीं करता या 100 किलो से अधिक मिक्स कचरा एक साथ फेंकता है, तो उस पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा। इसे शहर में स्वच्छता व्यवस्था को सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इसके साथ ही बड़े आयोजनों पर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। यदि किसी कार्यक्रम में 100 से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, जैसे शादी, जन्मदिन या धार्मिक आयोजन, तो आयोजकों को कार्यक्रम से कम से कम तीन दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति आयोजन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम ने लगभग 2,000 बड़े परिसरों को ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ की श्रेणी में शामिल किया है। इनमें वे आवासीय परिसर शामिल हैं जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है, जबकि 5,000 वर्गमीटर से अधिक के व्यावसायिक प्रतिष्ठान और 40,000 लीटर से अधिक पानी खपत वाले परिसर भी इस दायरे में आएंगे। इन सभी को नगर निगम के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन के अनुसार, वर्तमान में शहर के आदमपुर खंती लैंडफिल पर प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा पहुंचता है। यदि कचरे की सही छंटनी की जाए तो इसमें लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत कचरा उठाने वाले वाहनों की डिजिटल ट्रैकिंग की जाएगी और शिकायत निवारण प्रणाली को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
ये भी पढ़ें : MP में सरकारी नौकरी के लिए खत्म होगी ‘दो बच्चों की बाध्यता’, सीएम मोहन यादव ने निरस्त किया ड्राफ्ट नियम
नगर निगम को इस वर्ष ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से 104 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य है, लेकिन अब तक केवल 38.43 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। अधिकारियों का मानना है कि नए नियमों से न केवल शहर की स्वच्छता बेहतर होगी, बल्कि राजस्व में भी वृद्धि होगी।