यमुना नदी में बोट पर सवार होकर सैर करते लोग।  
टूर एंड ट्रैवल

दिल्ली में सिर्फ 100 रुपये में मिलेगा डल झील जैसा मजा, नजारा देखकर खुश हो जाएगा आपका दिल

Dal Lake Experience: दिल्ली में कई घाट हैं, ऐसे में सही घाट पर पहुंचना जरूरी है। बोटिंग और पक्षियों को दाना डालने वाला घाट वही है, जिसके पास धर्म संघ गौ सेवा सदन स्थित है। यहां काफी लोग आते हैं।

रंजन कुमार

Delhi Nature Spots: दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यमुना नदी के किनारे ऐसी जगह भी है, जहां सुबह का सुकून, पक्षियों की उड़ान और नदी की ठंडी हवा एक अलग दुनिया का एहसास कराती है। कश्मीरी गेट के पास स्थित यमुना घाट लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यहां सूर्योदय का नजारा, बोटिंग और फोटोग्राफी का एक्सपीरियंस डल लेक जैसे हिल स्टेशन से कम नहीं लगता है।

दिल्ली के यमुना घाट पर पहुंचने का सबसे आसान तरीका मेट्रो है। कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के बाद आप ऑटो, ई-रिक्शा या पैदल घाट तक जा सकते हैं। ऑटो का किराया 60 से 80 रुपये और ई-रिक्शा 10 से 20 रुपये प्रति व्यक्ति होता है।

सही घाट पर पहुंचना आवश्यक

यमुना के कई घाट हैं, ऐसे में सही घाट पर पहुंचना आवश्यक है। बोटिंग और पक्षियों को दाना डालने वाला घाट वही है, जिसके पास धर्म संघ गौ सेवा सदन स्थित है। यही वह स्थान है, जहां सबसे अधिक लोग सुबह-सुबह पहुंचते हैं। यमुना घाट पर विशेषकर सर्दियों की सुबह में पहुंचते यमुना नदी पर छाई हल्की धुंध और आसमान के रंग बदलते शेड्स दिल जीत लेते हैं। यहां सुबह में एक तरफ नारंगी और दूसरी तरफ नीला आसमान दिखता है। इसे लोग अपने कैमरे में कैद करने आते हैं।

पहले 50 रुपये था किराया

यमुना घाट पर काफी संख्या में लोग सीगल्स को दाना डालते दिखते हैं। जैसे ही नदी में खाना डाला जाता है, सैकड़ों पक्षी उड़कर पास आते हैं। यह देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। यह घाट युवाओं, फोटोग्राफरों और प्री-वेडिंग शूट के लिए भी पसंदीदा है। सुबह-सुबह यहां गिटार बजाते, गाने गाते और तस्वीरें खींचते लोग अक्सर दिखते हैं। यमुना घाट पर बोटिंग भी की जा सकती है। अमूमन वीकेंड पर बोटिंग का किराया 100 रुपये प्रति व्यक्ति है। पहले यह 50 रुपये था। वीक डेज पर किराया थोड़ा कम होता है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी

बोटिंग करते-करते यमुना के दूसरे किनारे भी जाया जा सकता है। यह हिस्सा अधिक खुला है। यहां से पुल तक पैदल घूमने का मौका मिलता है। वहां से वापस आने के लिए नाव ही इकलौता साधन होता है। यमुना घाट सिर्फ घूमने का स्थान नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अहम है। यहां पूजा-पाठ, अंतिम संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान सदियों से होते आ रहे हैं।

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