मेंटल हेल्थ फोटो.सोशल मीडिया
हेल्थ

World Mental Health Day: मानसिक तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी के शुरुआती लक्षण, इन्हें पहचानना क्यों जरूरी है?

Mental Health: मानसिक तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी के शुरुआती लक्षण। साथ ही समझें, मानसिक स्वास्थ्य के लिए किन बातों का ध्यान रखें, डिप्रेशन का इलाज कैसे होता है।

रीता राय सागर

Mental Health Awareness: हर समय थकान महसूस होना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, नींद न आना या बिना किसी वजह के बेचैनी बने रहना। कई बार इन संकेतों को काम का दबाव या रोजमर्रा की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता हैं। लेकिन जब ये छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय तक बने रहें और डेली लाइफ को प्रभावित करने लगे, मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

हर साल 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इस बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना है। साल 2026 में इस दिवस की थीम है- 'Lived experiences heard: real voices, real change', यानी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा अपना अनुभव रखने वाले लोगों की बात सुनना और उन्हें फैसलों में शामिल करना।

मानसिक तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी के शुरुआती लक्षण

सबसे पहले यह बात समझनी होगी कि तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी अलग-अलग  स्थितियां हैं। इनके लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं, लेकिन इनके कारण और इलाज अलग होते हैं।

लगातार उदास या खालीपन महसूस होना

अगर कई दिनों से मन उदास रहता है, निराशा महसूस होती है या पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि कम हो गई है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक ऐसे लक्षण बने रहना डिप्रेशन का संकेत हो सकते है।

बिना वजह बेचैनी होना

बार-बार किसी अनहोनी की आशंका होना, छोटी बातों को लेकर बहुत ज्यादा सोचना, बेचैनी महसूस करना या चिंता पर काबू न रख पाना एंग्जायटी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

नींद और भूख में बदलाव

नींद न आना, बार-बार जागना या सामान्य से ज्यादा सोना, भूख कम या ज्यादा लगना और वजन में अनचाहा बदलाव मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी के साथ दिखाई दे सकते हैं।

ध्यान लगाने में परेशानी

काम में मन न लगना, छोटी-छोटी बातें भूलना, फैसले लेने में मुश्किल होना या सामान्य जिम्मेदारियां निभाना कठिन लगना भी मेंटल हेल्थ के लिए ध्यान देने योग्य बातें हैं।

चिड़चिड़ापन और लोगों से दूरी बनाना

बात-बात पर गुस्सा आना, परिवार या दोस्तों से मिलने का मन न करना और अकेले रहने की इच्छा बढ़ना भी इमोशनल ब्रेकडाउन के संकेत हो सकते हैं।

इन आदतों पर ध्यान देना है जरूरी

  • बहुत ज्यादा कैफीन से बचें: अधिक चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक कुछ लोगों में बेचैनी और नींद की समस्या बढ़ाती हैं।

  • शराब से दूरी रखें: शराब मनोदशा और नींद पर असर डाल सकती है तथा कुछ दवाओं के साथ नुकसानदेह हो सकती है।

  • खाना छोड़ने की आदत न बनाएं: नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन लेने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है।

  • बहुत ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड फूड से दूरी: इनकी जगह फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन वाला संतुलित भोजन चुनें।

डिप्रेशन को जड़ से खत्म कैसे करें?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें

अगर उदासी, निराशा या रुचि की कमी हमेशा बनी रहती है, तो इन्हें मानसिक तनाव के लक्षण मानकर चिकित्सक से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक कारणों की जांच भी कर सकते हैं।

मनोचिकित्सा की मदद लें

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसे ट्रीटमेंट से इन सबसे निपटा जा सकता है। कुछ लोगों को एंटीडिप्रेसेंट दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसके साथ ही नियमित समय पर सोना-जागना, फिजिकल एक्टिविटी, बैलेंस मील और भरोसेमंद लोगों से जुड़े रहना ट्रीटमेंट में हेल्प कर सकता है।

भारत में टेली-मानस (Tele-MANAS) की 24 घंटे उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 पर मुफ्त सहायता ली जा सकती है।

Bypoll Results 2026 Live: पुडुचेरी में जीती AINRC, तमिलनाडु में TVK-AIADMK में टक्कर, बंगाल-असम में BJP आगे

Puducherry Bypoll Result: थट्टानचावाडी सीट पर AINRC के अशोक आनंद जीते, कांग्रेस को 8,482 वोटों से दी मात

क्या अंबानी तय करते हैं भारत की नीति? मस्क के सवाल पर बढ़ी बहस, राजीव चंद्रशेखर ने दिया तीखा जवाब

इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन में कश्मीरी युवक से मारपीट का आरोप, FIR दर्ज, फहीम नजीर ने राहुल से पूछे तीखे सवाल

दिल्ली में CJP मार्च से पहले हाई अलर्ट, कई ट्रेनें रद्द, 57 मेट्रो स्टेशन भी रहेंगे बंद