Female Hormones Affecting Body Weight: ज्यादातर लोग वजन बढ़ने का कारण मॉडर्न लाइफ स्टाइल को मानते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि वजन बढ़ने का कारण सिर्फ ज्यादा खाना या व्यायाम न करना है।
हालांकि यह कुछ हद तक सच भी है। दोनों बातें वजन बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं, लेकिन हमेशा यही मुख्य कारण नहीं होतीं। महिलाओं में कई बार वजन बढ़ने का कारण हार्मोनल असंतुलन भी होता है।
हमारे शरीर में हार्मोन मेटाबॉलिज्म, भूख, शरीर में फैट जमा होने की प्रक्रिया और ऊर्जा के स्तर जैसी कई महत्वपूर्ण चीजों को नियंत्रित करते हैं। जब इन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, तो खानपान और शारीरिक गतिविधि में कोई बदलाव न होने के बावजूद भी शरीर अतिरिक्त चर्बी जमा करने लगता है, खासकर पेट के आसपास।
जब शरीर किसी हार्मोन का उत्पादन जरूरत से ज्यादा या कम करने लगता है, तो उसे हार्मोनल असंतुलन कहा जाता है। हार्मोन के स्तर में मामूली बदलाव भी शरीर की कई प्रक्रियाओं, खासकर वजन को प्रभावित कर सकते हैं।
हार्मोन ऐसे केमिकल मैसेंजर हैं, जो पाचन, मेटाबॉलिज्म, मूड और प्रजनन स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर में वजन बढ़ना, थकान और अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
हार्मोन शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम की ग्रंथियों द्वारा बनते हैं। ये रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंचकर कई जरूरी चीजों को कंट्रोल करते हैं, जैसे-
हमारे शरीर में मौजूद हार्मोन यह तय करते हैं कि शरीर ऊर्जा का उपयोग कैसे करेगा और फैट कहां जमा होगा, इसलिए इनमें गड़बड़ी होने का सीधा असर हमारे वजन पर पड़ता है।
इंसुलिन रक्त में शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। जब शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो जाता है, तो अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है और वजन बढ़ने लगता है।
थायरॉयड हार्मोन मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। यदि इनका स्तर कम हो जाए, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने लगता है।
कोर्टिसोल को स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। इसका स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहने पर भूख अधिक लगने लगती है और खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है।
एस्ट्रोजन महिलाओं में शरीर में फैट के वितरण को नियंत्रित करता है। पीसीओएस या मेनोपॉज जैसी स्थितियों में इसके स्तर में बदलाव होने से वजन बढ़ सकता है।
ये दोनों हार्मोन भूख और पेट भरने के संकेत देते हैं। इनका संतुलन बिगड़ने पर बार-बार भूख लग सकती है और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाना खा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, थायरॉयड संबंधी रोग और पीसीओएस जैसी हार्मोनल समस्याएं मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है।
यदि आपका वजन हार्मोनल कारणों से बढ़ रहा है, तो शरीर में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
यदि खानपान और एक्सरसाइज में कोई बड़ा बदलाव किए बिना वजन बढ़ने लगे, तो यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। ऐसे में शरीर कैलोरी को पहले की तरह प्रभावी ढंग से बर्न नहीं कर पाता।
यदि पेट की चर्बी आसानी से कम नहीं हो रही है, तो इसके पीछे कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर, इंसुलिन रेजिस्टेंस या एस्ट्रोजन असंतुलन जिम्मेदार हो सकता है।
यदि पर्याप्त आराम के बाद भी हमेशा थकान महसूस होती है, तो इसकी वजह थायरॉयड जैसी हार्मोनल समस्या हो सकती है। मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर शरीर कम ऊर्जा पैदा करता है।
बार-बार पीरियड्स का मिस होना या अनियमित होना हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। पीसीओएस जैसी स्थिति में ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और वजन भी बढ़ सकता है।
लेप्टिन और घ्रेलिन हार्मोन भूख को नियंत्रित करते हैं। इनके असंतुलित होने पर बार-बार भूख लगती है और मीठा या ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
यदि हेल्दी डाइट और नियमित व्यायाम के बावजूद वजन कम नहीं हो रहा है, तो इसका कारण हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।
हार्मोन हमारे मूड और भावनाओं को भी प्रभावित करते हैं। इनके असंतुलन से अचानक मूड बदलना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी या चिंता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
थायरॉयड विकार या एंड्रोजन हार्मोन के असंतुलन के कारण बाल पतले होने या झड़ने की समस्या हो सकती है।
हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण मुंहासे, त्वचा का अधिक तैलीय होना या पिग्मेंटेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पीसीओएस में ये लक्षण अक्सर देखने को मिलते हैं।
हार्मोन हमारे स्लीप साइकल को भी नियंत्रित करते हैं। कोर्टिसोल या मेलाटोनिन का असंतुलन अनिद्रा या खराब नींद का कारण बन सकता है, जिसका असर वजन पर भी पड़ता है।
महिलाओं के लाइफ में कई स्टेज में हार्मोन में स्वाभाविक रूप से बदलाव होते हैं। इनमें प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज शामिल है। हालांकि, इनके अलावा भी कई कारण हैं, जिनकी वजह से किसी भी समय हार्मोन का स्तर असंतुलित हो सकता है। हार्मोन में उतार-चढ़ाव या असंतुलन के कुछ सामान्य कारण तनाव, कुछ खास प्रकार की दवाइयों का सेवन, स्टेरॉयड का अधिक इस्तेमाल।