What Is Autism: दुनियाभर में लाखों बच्चे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से जूझ रहे हैं। यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है, जो बच्चों को बुरी तरह प्रभावित करती है। कई बार माता-पिता बच्चे में शुरुआती दौर में ऑटिज्म की पहचान नहीं कर पाते हैं।
शुरूआत में ऑटिज्म की पहचान करना कई बार मुश्किल होता है, क्योंकि यह बचपन से ही होने वाली एक बीमारी है और इसके लक्षण थोड़े-थोड़े बचपन से ही मिलते-जुलते होते हैं। यही कारण है कि ऑटिज्म की पहचान कई बार बचपन में नहीं हो पाती है और जब तक इसकी पहचान होती है, तब तक इसके लक्षणों को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
Autism Spectrum Disorder एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित करती है। इसके कारण बच्चे के व्यवहार, बोलने की क्षमता और दूसरों के साथ जुड़ने के तरीके व उके व्यवहार में देखने को मिलता है। हर बच्चे में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इसे स्पेक्ट्रम कहा जाता है। ये एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें हर बच्चे के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।
माता-पिता और परिवार का सहयोग बच्चे के विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताना, उससे बातचीत करना, उसकी गतिविधियों में शामिल होना और सकारात्मक माहौल देना बेहद जरूरी है। साथ ही, माता-पिता को खुद भी जागरूक रहना चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए।
आजकल एक आम सवाल यह है कि क्या टीवी, मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने से बच्चों में ऑटिज्म बढ़ रहा है। डॉक्टर बताते हैं कि स्क्रीन टाइम सीधे तौर पर ऑटिज्म का कारण नहीं है। लेकिन बहुत ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों की भाषा और सामाजिक कौशल के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे बच्चे कम बातचीत करते हैं और लोगों से जुड़ने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं, जो ऑटिज्म जैसे लक्षणों को बढ़ा सकता है।
कम से कम 5 साल तक बच्चों को मोबाइल या टीवी स्क्रीन से दूर ही रखना चाहिए। 0 से 5 साल तक उम्र में बच्चा जितना बाहर खेलने, कूदने और दूसरों के साथ बातचीत करने में अपना समय बिताए। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल या किसी भी स्क्रिन का इस्तेमाल नहीं करने देना चाहिए। 2 से 5 साल की उम्र के बच्चों को 1 दिन में 1 घंटा मोबाइल चलाना सुरक्षित है।
इस थेरेपी की मदद से कम्युनिकेशन, व्यवहार कौशल और बोलचाल की मदद से रोगी के व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है।
इस थेरेपी का उपयोग तब होता है जब बच्चे या पेशेंट को कुछ भी बोलने में दिक्कत होती है।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी (ओटी) की मदद से आवश्यक या बुनियादी कौशल सिखाए जाते हैं। लिखने की कला, मोटर स्किल और खुद की देखभाल करने का कौशल।
आमतौर पर ऑटिज्म के इलाज के लिए कोई विशेष दवा नहीं है। हालांकि, ऑटिज्म के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं के इलाज के लिए कुछ दवाएं उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल डॉक्टरी परामर्श के बाद ही किया जाना चाहिए। इन दवाओं से लक्षणों में आराम मिलता है, लेकिन यह अकेला व्यक्ति को ऑटिज्म से ठीक नहीं कर सकता है। इसके लिए दवा, थेरेपी, फैमिली सपोर्ट के साथ-साथ, डॉक्टर के निर्देश का पालन करना भी जरूरी है।