मन उदास रहने पर खुली हवा में टहलें और अपनी पसंद की एक्टिविटी के लिए समय निकालें।
पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और नियमित दिनचर्या से मूड बेहतर करने में मदद मिलती है।
उदासी दो सप्ताह या उससे ज्यादा समय तक बनी रहे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
Mood Boosting Activities: कभी-कभी बिना किसी वजह के मन उदास हो जाता है। जिन कामों में पहले खुशी मिलती थी, उसमें भी मन नहीं लगता। किसी से बात करने का मन नहीं करता और छोटी-छोटी बातें परेशान करने लगती हैं।
काम का दबाव, नींद की कमी, रिश्तों में तनाव और लगातार एक जैसी दिनचर्या इसके पीछे वजह हो सकती है। ऐसे में खुद को जबरदस्ती खुश रखने के बजाय अपनी भावनाओं को समझना और छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना अधिक मददगार हो सकता है।
मन भारी लग रहा हो तो 10-15 मिनट टहलने निकल जाएं। संभव हो तो पार्क या ऐसी जगह जाएं जहां हरियाली हो। हल्की शारीरिक गतिविधि तनाव कम करने और मूड बेहतर करने में मदद करती है।
हर परेशानी का समाधान तुरंत मिलना जरूरी नहीं है। कभी-कभी किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य या साथी से अपनी बात साझा करने भर से मन हल्का महसूस होता है। बात करने का मन न हो, तो खुद को थोड़ा समय दें।
देर रात तक जागना, पर्याप्त नींद न लेना या लंबे समय तक भूखे रहना आपके मूड और एनर्जी पर असर डालता है। सोने-जागने का समय नियमित रखें और दिनभर संतुलित भोजन करें।
जब मन उदास हो, तो हर काम पूरा करने की उम्मीद खुद से न रखें। बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटें। जरूरी कामों की सूची बनाएं और बीच-बीच में आराम करें। हर समय प्रोडक्टिव बनने की कोशिश न करें।
अपना पसंदीदा गाना सुनना, पौधों की देखभाल करना, किताब पढ़ना, खाना बनाना या कुछ देर ड्रॉइंग करना अच्छा लग सकता है। शुरुआत में मन न भी करे, तो किसी आसान गतिविधि के लिए थोड़ा समय निकालें।
दिन में कुछ मिनट निकालकर लिखें कि आपको कैसा महसूस हो रहा है और कौन-सी बातें परेशान कर रही हैं। जर्नलिंग, एक ट्राई एंड टेस्टेड रिलीफ देने वाला माना जाता है। इससे अपनी भावनाओं और तनाव के कारणों को समझने में मदद मिलती है। खुद को जज करने के बजाय अपनी भावनाओं को स्वीकार करें।
अगर उदासी ज्यादा दिनों तक बनी रहती है, दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं या पहले पसंद आने वाली चीजों में भी रुचि खत्म हो जाती है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें। मदद लेने का मतलब कमजोर होना नहीं है।