Grand Parents Day Importance: दादा-दादी और नाना-नानी का रिश्ता सिर्फ परिवार का हिस्सा होने तक का नहीं होता। बचपन में उनके द्वारा सुनाई गई कहानियों में उनका प्यार और लाड छुपा होता है। उनके द्वारा कही गई छोटी-छोटी बातें उनके जीवन भर के अनुभव होते हैं, बिना किसी शर्त के मिलने वाला उनका प्यार जिंदगी भर हमारे साथ रहता है। यही वजह है कि बच्चों के जीवन में ग्रैंडपैरेंट्स की जगह बेहद खास होती है।
बचपन में दादा-दादी या नाना-नानी से सुनी कहानियां भले ही उस समय सिर्फ मनोरंजन का हिस्सा हों, लेकिन उनमें छिपी सीख ही चरित्र निर्माण करती है। राजा-रानी, पंचतंत्र या उनके अपने बचपन के किस्से बच्चों को सही और गलत के बीच सरल भाषा में फर्क समझाने का आसान तरीका हैं।
बड़ों का सम्मान करना, मिल-जुलकर रहना, जरूरतमंद की मदद करना और परिवार की अहमियत समझना जैसे संस्कार बच्चों को घर के बड़े-बुजुर्गों ही सिखाते हैं। उनके अपने जीवन के अनगिनत अनुभव बच्चों को किताबों से अलग जिंदगी को समझने का नजरिया देते हैं।
दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों को सिर्फ प्यार ही नहीं देते, बल्कि उन्हें इमोशनल सिक्योरिटी भी देते हैं। अपनी हर परेशानी लेकर उनके पास जाना और समस्या का हल मिल जाना, उनकी बातें सुनना, बच्चों की छोटी-छोटी परेशानियों को समझना और बिना जज किए उनका साथ देना, ग्रैंड पेरेंट्स बिना कहे सब कर जाते थे।
परिवार की पुरानी कहानियां, रीति-रिवाज, त्योहार मनाने के तरीके और पुरानी यादें अक्सर ग्रैंडपैरेंट्स के पास ही सुरक्षित रहती हैं। उनसे जुड़कर बच्चों को अपने परिवार और उसकी जड़ों के बारे में जानने का मौका मिलता है। कई बार त्योहार या फिर शादी-ब्याह में बुजुर्गों को ही ढूंढा जाता है, क्यों कि घर के रीति-रिवाज के बारे में उन्हें ही पता होता है और वे आने वाली जेनेरेशन तक उसे पहुंचाते हैं।
आज की व्यस्त जिंदगी में बच्चों और ग्रैंडपैरेंट्स का साथ भले कम हो गया हो, लेकिन उनके साथ बिताया समय बेहद खास यादें होती है, जो कभी धूमिल नहीं होती है। साथ बैठकर खाना खाना, पुरानी तस्वीरें देखना या बस उनकी बातें सुनना, उनसे किसी बहाने से लाड़ लगाना, भी उनके लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं।