Chanakya Niti For Home: अपना घर खरीदना या बनाना जिंदगी के बड़े फैसलों में से एक होता है। ऐसे में केवल घर की कीमत, साइज या सुंदरता ही नहीं, बल्कि उसके आसपास का माहौल और जरूरी सुविधाएं भी देखना जरूरी है।
चाणक्य नीति से जुड़े एक प्रसिद्ध श्लोक में ऐसी जगह पर रहने से बचने की सलाह दी गई है, जहां आजीविका, विद्वान लोग, शासन-व्यवस्था, नदी और वैद्य जैसी जरूरी चीजें उपलब्ध न हों। वर्तमान समय में इस विचार को अपनी जरूरतों के हिसाब से समझते हुए इन 4 बातों का ध्यान रखें।
चाणक्य के विचार में रहने की जगह ऐसी होनी चाहिए जहां आजीविका के साधन हों। पुराने समय में इसका संबंध व्यापार और रोजगार के अवसरों से था। आज इसे नौकरी, कारोबार, बाजार और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की उपलब्धता है। घर ऐसी जगह हो जहां आने-जाने की सुविधा हो और कामकाज के लिए बहुत ज्यादा दूर न जाना पड़े।
चाणक्य नीति में विद्वान और अच्छे लोगों की उपस्थिति को जरूरी बताया गया है। इसका अर्थ यह है कि घर चुनते समय आसपास के सामाजिक माहौल को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पड़ोस कैसा है, आसपास रहने वाले लोगों का व्यवहार कैसा है और बच्चों के लिए माहौल कैसा है- इन बातों की जानकारी घर खरीदने से पहले ले लेनी चाहिए।
मूल श्लोक में राजा की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है, जिसे उस समय की शासन-व्यवस्था से जोड़कर समझा जाता था। आज के परिवेश में इसका अर्थ ऐसी जगह है, जहां कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हो। घर खरीदने से पहले इलाके की सुरक्षा, सड़क और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ यह भी देखना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर पुलिस, प्रशासन या दूसरी जरूरी सेवाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं।
चाणक्य से जुड़े इस श्लोक में वैद्य यानी डॉक्टर का भी वर्णन मिलता है। आज के समय में घर चुनते समय अस्पताल, डॉक्टर, मेडिकल स्टोर और दूसरी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता भी प्रैक्टिकली जरूरी है। खासकर परिवार में बच्चे, बुजुर्ग या किसी हेल्थ प्रॉब्लम वाले लोग रहते हों, तो अस्पताल और डॉक्टर की उपलब्धता को प्राथमिकता देना बेहतर है। स्कूल, बाजार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाएं भी घर के आसपास होनी जरूरी है।
चाणक्य से जुड़े मूल श्लोक में नदी का भी वर्णन मिलता है। प्राचीन समय में नदी पीने के पानी और जीवन-यापन का स्त्रोत होती थी। घर खरीदते समय पानी की उपलब्धता, जल निकासी और बारिश के दौरान इलाके में जलभराव जैसी बातों की भी जांच करनी चाहिए।
घर केवल चार दीवारों का नाम नहीं है। जिस इलाके में परिवार ताउम्र रहने वाला है, वहां रोजगार, सुरक्षा, पड़ोस, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजमर्रा की जरूरतों की उपलब्धता बेहद जरूरी है।