SIA Crackdown On Kashmiri Pandit Killers: कश्मीर घाटी के इतिहास में 1990 का वह दौर आज भी रूह कंपा देता है, जब कश्मीरी पंडितों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया था। उसी खौफनाक दौर की एक सबसे बर्बर दास्तां कवि सर्वानंद कौल 'प्रेमी' और उनके बेटे की हत्या की थी। अब, करीब 36 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने इस दोहरे हत्याकांड की फाइलों से धूल झाड़ी है और गुनहगारों तक पहुँचने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।
साल 1990 की शुरुआत में आतंकवादियों ने अनंतनाग के कोकेरनाग स्थित सोफ शाली गांव में सर्वानंद कौल 'प्रेमी' के घर पर धावा बोला था। आतंकियों ने न केवल प्रेमी जी का बल्कि उनके बेटे वीरेंद्र कौल का भी अपहरण कर लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरी घाटी को झकझोर कर रख दिया। दोनों को बर्बर यातनाएं दी गईं और फिर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, दहशत फैलाने के लिए आतंकियों ने पिता-पुत्र के शवों को एक पेड़ से लटका दिया था। इस वीभत्स घटना ने कश्मीरी पंडितों के मन में ऐसा खौफ पैदा किया कि घाटी से उनका बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया।
सर्वानंद कौल 'प्रेमी' कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वे जम्मू-कश्मीर के एक प्रसिद्ध साहित्यकार, विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय अखंडता, सांप्रदायिक सौहार्द और कश्मीरी भाईचारे (कश्मीरियत) को बढ़ावा देने में लगा दिया था। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कश्मीर की उस साझा संस्कृति और विद्वता पर हमला था, जिसे उन्होंने दशकों तक सींचा था।
इंसाफ की इस नई मुहिम के तहत, SIA की टीमों ने जम्मू-कश्मीर में कुल नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह ऑपरेशन आतंकवादियों और उनके उन सहयोगियों की तलाश के लिए चलाया गया, जो इस 36 साल पुराने केस में संदिग्ध हैं। जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार:
6 ठिकाने राजौरी जिले में तलाशे गए।
2 ठिकाने जम्मू क्षेत्र में रेड के दायरे में रहे।
1 ठिकाना कश्मीर घाटी में स्थित था।
यह पूरी कार्रवाई अनंतनाग के डोरू पुलिस स्टेशन में दर्ज उस एफआईआर से जुड़ी है, जिसे अब एसआईए ने दोबारा खोलकर अपने हाथ में ले लिया है।
यह कार्रवाई तब हुई है जब हाल ही में SIA को अन्य पुराने मामलों में बड़ी सफलता मिली है। जून 2026 में, एजेंसी ने सरला भट हत्याकांड (1990) में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें जेल में बंद JKLF प्रमुख यासीन मलिक को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। 34 साल बाद उस केस के खुलने से यह उम्मीद जगी है कि अब सर्वानंद कौल 'प्रेमी' जैसे अन्य पीड़ितों को भी न्याय मिलेगा।
1990 के उस दौर में वकील टिक्का लाल टपलू, न्यायमूर्ति नीलकंठ गंजू और दूरदर्शन निदेशक लासा कौल जैसे दिग्गजों की हत्याएं भी इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थीं। आंकड़ों के अनुसार, उस दौरान लगभग 1,500 से 2,000 कश्मीरी पंडितों की हत्याएं हुईं और 5 लाख से अधिक लोगों को पलायन करना पड़ा। कश्मीरी पंडित संगठन लंबे समय से इन हत्याओं की जांच के लिए एक औपचारिक आयोग की मांग कर रहे थे। अब एसआईए की यह सक्रियता दिखाती है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और देर से ही सही, न्याय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।