बाबरी मस्जिद विध्वंस की तस्वीर। सोर्स: इंटरनेट
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बाबरी मस्जिद को टूटते देख सोनिया गांधी क्यों रोने लगी? मात्र 1 प्वॉइंट में जानें

Sonia Gandhi Interview Babri Masjid: सोनिया गांधी ने बताया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की तस्वीरें देखकर वह रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि तभी धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए लंबी लड़ाई लड़ने का एहसास हुआ।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • बाबरी मस्जिद विध्वंस की तस्वीरें देखकर भावुक हो गई थीं सोनिया गांधी।

  • सोनिया ने कहा, धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

  • बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति के उभार में कांग्रेस की गलतियों को भी माना जिम्मेदार।

Sonia Gandhi Interview Babri Masjid Case: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस, देश में लगे आपातकाल और इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की हत्या से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की तस्वीरें जब उन्होंने टेलीविजन पर देखीं, तो वह रो पड़ी थीं। उसी समय उन्हें एहसास हो गया था कि अब उन्हें उस धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

सोनिया गांधी ने ये बातें अपनी आने वाली किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के लॉन्च से पहले अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' और 'द गार्जियन' को दिए इंटरव्यू में कहीं। उन्होंने इस दौरान भारतीय राजनीति के तीन महत्वपूर्ण दौरों और उनसे जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया। सोनिया ने यह भी स्वीकार किया कि बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति के उभार में कांग्रेस की गलतियों का भी योगदान रहा है।

बाबरी मस्जिद विध्वंस की तस्वीरें देखकर रो पड़ी थीं सोनिया

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को याद करते हुए सोनिया गांधी ने बताया कि टेलीविजन पर मस्जिद को ढहाए जाने की तस्वीरें देखकर वह भावुक हो गई थीं। उन्होंने कहा कि उसी दिन उन्हें महसूस हुआ कि देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बचाने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा।

सोनिया गांधी के मुताबिक, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके सहयोगियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण का सपना देखा था, उसे बचाना अब एक बड़ी चुनौती बन चुका था।

उन्होंने अपनी पार्टी की भूमिका पर भी आत्ममंथन किया। सोनिया ने माना कि बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति के विस्तार में कांग्रेस की गलतियों का भी कुछ योगदान रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कई मामलों में हम बहुत लापरवाह रहे। हमारा रवैया ऐसा था कि जो हो रहा है, उसे होने दो।"

इमरजेंसी के लिए सिर्फ संजय गांधी जिम्मेदार नहीं थे

सोनिया गांधी ने 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के लिए केवल संजय गांधी को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी काफी दबाव था।

सोनिया के मुताबिक, परिवार के भीतर भी आपातकाल लगाने के फैसले पर सहमति नहीं थी। राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे। उन्होंने अपनी मां को अगला चुनाव आने तक इंतजार करने की सलाह दी थी। वहीं, संजय गांधी आपातकाल लगाने के पक्ष में थे। एक पारिवारिक डिनर के दौरान उन्होंने कहा था कि विपक्ष उनकी मां को बर्बाद कर देगा।

'द गार्जियन' के मुताबिक, सोनिया गांधी ने अपनी किताब में लिखा है कि अगर संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता, तो बाद में हुए नुकसान का बड़ा हिस्सा रोका जा सकता था।

सोनिया ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई और बिना मुकदमे हिरासत में रखने के खिलाफ मिलने वाला कानूनी संरक्षण भी समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, इंदिरा गांधी ने बाद में हालात को समझा और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया। सोनिया के मुताबिक, इंदिरा ने आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से दुख जताया और माफी भी मांगी थी।

इंदिरा गांधी को अपनी हत्या का पहले से था अंदेशा

सोनिया गांधी ने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या से पहले के घटनाक्रम को भी याद किया। उन्होंने बताया कि स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई के बाद इंदिरा गांधी को लगातार धमकियां मिल रही थीं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे सशस्त्र उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

सोनिया के मुताबिक, जब इंदिरा गांधी ने सैन्य कार्रवाई से हुई तबाही की तस्वीरें देखीं, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उन्हें अपनी हत्या का अंदेशा था। उन्होंने परिवार को पहले ही बता दिया था कि उनकी मृत्यु होने पर क्या करना चाहिए। सोनिया ने बताया कि इंदिरा गांधी ने राहुल गांधी से कहा था कि उन्हें बहादुर बनना होगा और रोना नहीं है।

31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके सिख सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। सोनिया ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर वह मौके पर पहुंचीं और इंदिरा को खून से लथपथ हालत में देखा। वह उन्हें अस्पताल लेकर गईं और पूरे रास्ते अपनी बाहों में थामे रहीं। सोनिया के मुताबिक, उन्हें तभी एहसास हो गया था कि इंदिरा गांधी अब इस दुनिया में नहीं रहीं।

राजीव गांधी की हत्या की सच्चाई सामने आने की उम्मीद कम

सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड से जुड़ी पूरी सच्चाई अब तक सामने नहीं आ सकी है। उनका आरोप है कि जांच के लिए गठित सबसे हालिया आयोग को केंद्र की मोदी सरकार ने बंद कर दिया। सोनिया ने निराशा जताते हुए कहा कि अब शायद ही कभी उन्हें इस मामले की पूरी सच्चाई पता चल पाएगी।

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