Hindi Diwas History: हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिंदी के प्रचार प्रसार, महत्व और विकास पर चर्चा होती है। क्या आप जानते हैं कि हिंदी दिवस मनाने के लिए 14 सितंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई। आइए आपको हिंदी दिवस से जुड़े उस तथ्य के बारे में बताते हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है।
देश को आजादी मिलने के बाद संविधान बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। उस समय सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह तय करना था कि देश की राजभाषा कौन सी होगी। भारत में अलग अलग क्षेत्रों में कई भाषाएं बोली जाती थीं। ऐसे में भाषा के मुद्दे पर सहमति बनाना आसान नहीं था, इस समस्या का समाधान निकालने के लिए विशेष समिति बनाई गई थी, इसका जिम्मा कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और गोपालस्वामी आयंगर को सौंपा गया था।
हिंदी को राजभाषा बनाने के मुद्दे पर संविधान सभा में लंबे समय तक चर्चा हुई। करीब तीन साल तक इस विषय पर अलग अलग विचार सामने आते रहे। हिंदी को राजभाषा बनाने के पक्ष में कई सदस्य थे, जबकि दक्षिण भारत समेत कई क्षेत्रों के प्रतिनिधि अंग्रेजी को अचानक हटाने के पक्ष में नहीं थे। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाना जरूरी था। इसके लिए बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाया गया।
लंबी चर्चा के बाद कन्हैयालाल मुंशी और गोपालस्वामी आयंगर के नाम से मुंशी-आयंगर फॉर्मूला सामने आया। इस समझौते के तहत हिंदी को संघ की राजभाषा बनाने पर सहमति बनी। साथ ही अंग्रेजी को भी सरकारी कामकाज में जारी रखने की व्यवस्था की गई। आखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया।
संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और इसकी लिपि देवनागरी निर्धारित की गई। वहीं अनुच्छेद 351 में हिंदी के विकास और उसे समृद्ध बनाने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं। इसी ऐतिहासिक फैसले की याद में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि हिंदी को राष्ट्रभाषा नहीं बल्कि संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।
हिंदी का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में हिंदी बोलने और समझने वाले लोग मौजूद हैं। भारत में भी हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 43 प्रतिशत लोगों ने हिंदी को अपनी मातृभाषा बताया था।