मेजर दीक्षा सी।  
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कौन हैं दीक्षा सी... भारतीय सेना में क्या नया इतिहास रच दिया? डिटेल स्टोरी यहां

Indian Army News: भारतीय सशस्त्र बलों में मेजर दीक्षा सी. मुदादेवन्नवर ने इतिहास रच दिया है। मेजर दीक्षा को बलिदान बैज मिला है। भारतीय सेना में पहली बार किसी महिला अफसर को यह सम्मान दिया गया है।

रंजन कुमार

Major Deeksha C News : भारतीय सेना के सबसे साहसी और घातक दस्ते पैरा स्पेशल फोर्सेज में शामिल होना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके सीने पर बलिदान बैज सजाना किसी भी सैनिक के लिए सर्वोच्च सम्मान की बात होती है। मेजर दीक्षा सी. मुदादेवन्नावर ने इतिहास रचते हुए इस सम्मान को हासिल किया है। वह भारतीय सेना की पहली महिला अफसर बनी हैं जिन्हें प्रतिष्ठित बलिदान बैज से नवाजा गया है। यह बैज केवल अटूट देशभक्ति, अदम्य साहस और कठोरतम त्याग का प्रतीक माना जाता है।

कर्नाटक के दावणगेरे की रहने वाली मेजर दीक्षा के रगों में सेवा का जुनून स्कूल के दिनों से ही था, जब उन्होंने एनसीसी के जरिए अनुशासन और रणनीतिक सोच का पाठ सीखा। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और भारतीय सेना के मेडिकल कोर (AMC) में बतौर डॉक्टर शामिल हुईं। सेना में आने से पहले उन्होंने ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में भी सेवा दी थी।

चुनौतियों को दी मात

मेजर दीक्षा का सफर आसान नहीं था। विशिष्ट पैराशूट रेजिमेंट में शामिल होने के उनके सपने को शुरुआती दिनों में दो बार झटका लगा, जब वे शारीरिक मापदंडों के कारण रिजेक्ट कर दी गईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शिवेश सिंह ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें प्रेरित किया। अपनी कड़ी मेहनत और जिजीविषा के दम पर उन्होंने अंततः दुनिया की सबसे कठिन चयन प्रक्रिया में से एक को पार किया और दिसंबर 2022 में स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा बनीं।

युद्ध के मैदान में जीवन रक्षक

एक मेडिकल ऑफिसर के रूप में मेजर दीक्षा की भूमिका बेहद संवेदनशील है। उन्हें जोखिम भरे ऑपरेशंस के दौरान पैरा कमांडो के साथ मोर्चे पर तैनात रहना होता है, ताकि घायल सैनिकों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके। इतना ही नहीं ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भी उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी

मेजर दीक्षा केवल एक जांबाज अफसर और कुशल डॉक्टर ही नहीं हैं, बल्कि वे एक मंझी हुई भरतनाट्यम नृत्यांगना, कराटे एक्सपर्ट और बाइक राइडर भी हैं। वह निर्भया नामक एनजीओ के माध्यम से सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल महिला सशक्तीकरण की मिसाल है, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

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