UPI Charge On Merchant Transactions: केंद्र सरकार द्वारा बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने के फैसले से देश भर में बहस छिड़ गई है। जहां कुछ वित्तीय विशेषज्ञ इसे डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं।
इस गर्मागर्म बहस के बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी का एक बयान सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने 100 रुपये पर 40 पैसे शुल्क का बचाव करते हुए चाणक्य नीति का हवाला दिया और स्पष्ट किया कि बिना कर के कोई भी सरकार नहीं चल सकती।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने UPI पर लगने वाले नए शुल्क का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 100 रुपये के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 40 पैसे देने हैं और वह भी केवल बड़े लेनदेन पर लागू होगा।
तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि क्या 40 पैसे देने से आपकी जान निकल जाएगी, बिल्कुल नहीं, क्योंकि व्यवस्था चलाने के लिए लागत देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चेकबुक जैसी अन्य बैंकिंग सेवाओं की तरह इस मामूली शुल्क की भी धीरे धीरे लोगों को आदत पड़ जाएगी।
अपनी बात को विस्तार से समझाते हुए अशोक लाहिड़ी ने प्राचीन भारतीय कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य का विशेष उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी प्रजा से कर ठीक उसी तरह वसूलना चाहिए, जैसे मधुमक्खी फूल को बिना नुकसान पहुंचाए शहद इकट्ठा करती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है और इसे नीति आयोग का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार हर काम पर अनिश्चितकाल के लिए सब्सिडी नहीं दे सकती और नागरिकों को कर देने की आदत डालनी चाहिए।
केंद्र सरकार के नए फैसले के अनुसार आगामी 15 अक्टूबर से मर्चेंट ट्रांजैक्शन यानी पी2एम भुगतान पर नया नियम लागू होगा। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाया जाएगा।
राहत की बात यह है कि 2,000 रुपये तक के लेनदेन और सामान्य लोगों के बीच आपस में होने वाले पी2पी ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह शुल्क व्यापारियों को देना होगा, जिससे बैंकों और भुगतान ऐप्स के तकनीकी ढांचे व सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके।
सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर के एमडीआर निर्णय को चुनौती दी गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह व्यवस्था बिना सार्वजनिक परामर्श के लागू की गई है, जिससे कम मार्जिन वाले व्यापारियों पर असर पड़ेगा। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इसे 'मोदी टैक्स' करार दिया है, जबकि समर्थक इसे डिजिटल पेमेंट ढांचे को टिकाऊ बनाने वाला कदम बता रहे हैं।